पेगासस की निगरानी सूची में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के अधिकारियों, वकील के नम्बर शामिल: रिपोर्ट

2021-08-05T00:15:20.657

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री के दो अधिकारियों, भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के वकील और अगस्ता वेस्टलैंड मामले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के वकील के फोन नंबरों के साथ-साथ शीर्ष अदालत के अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश के पुराने नंबर इजराइली स्पाईवेयर पेगासस के संभावित लक्ष्यों की सूची में थे। ‘द वायर’ द्वारा जारी नवीनतम नामों से यह जानकारी मिली।

इसमें कहा गया है कि राजस्थान का एक मोबाइल नंबर जो पूर्व में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नाम पर पंजीकृत था, 2019 में संभावित लक्ष्यों के डेटाबेस में जोड़ा गया था। न्यायमूर्ति मिश्रा सितंबर 2020 में उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए और अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं।
समाचार पोर्टल ने कहा कि इसके अलावा, 2019 के वसंत में किसी समय, उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री के दो अधिकारियों के टेलीफोन नंबर "गुप्त सूची" में शामिल किए गए थे, जिसमें सैकड़ों नंबर शामिल थे। इनमें से कुछ पेगासस स्पाईवेयर के साथ लक्षित होने के स्पष्ट सबूत दिखते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के महत्वपूर्ण ''रिट'' खंड में काम किया था, जब उनके नंबर डेटाबेस में जोड़े गए थे।

‘द वायर’ सहित एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम ने बताया है कि 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबर इजराइली कंपनी एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाईवेयर का उपयोग कर निगरानी के लिए संभावित लक्ष्यों की सूची में थे।

एनएसओ के लीक हुए डेटाबेस की सूची में नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेता, केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद सिंह पटेल और अश्विनी वैष्णव, उद्योगपति अनिल अंबानी, सीबीआई के एक पूर्व प्रमुख और कम से कम 40 पत्रकार शामिल थे। हालांकि, यह स्थापित नहीं हुआ है कि सभी फोन हैक किए गए थे।

कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दल आरोपों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं और सरकार से यह भी स्पष्ट करने के लिए कह रहे हैं कि पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।

सरकार इस मामले में विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर रही है।

‘द वायर’ द्वारा संपर्क किए जाने पर, उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री के दो अधिकारियों - जिनमें से एक अदालत से सेवानिवृत्त हो चुके हैं - ने इस पर हैरानी जतायी कि कोई भी आधिकारिक एजेंसी उन्हें या उनके वर्ग को निगरानी के संभावित लक्ष्य के तौर पर क्यों देखेगी।

इसमें कहा गया है कि दोनों अधिकारियों के स्मार्टफोन की फॉरेंसिक जांच के अभाव में यह स्थापित करना असंभव है कि क्या वे केवल रुचि के व्यक्ति थे या वास्तव में उनकी निगरानी की गई।
‘द वायर’ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि उस वर्ष की शुरुआत में, अनिल अंबानी के रिलायंस एडीएजी समूह के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​के एक मामले में ‘‘एक आदेश के साथ छेड़छाड़’’ करने के लिए दो जूनियर कोर्ट कर्मचारियों को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि यह ‘‘विश्वास करने का कोई कारण नहीं है’’ कि इसके कई सप्ताह बाद दो रजिस्ट्री अधिकारियों का चयन उस मामले से जुड़ा था।

पहले बताए गए नामों की सूची के अनुसार, अंबानी भी पेगासस के संभावित लक्ष्य थे।

‘द वायर’ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश मिश्रा से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने नंबर छोड़ने के बाद भी अपने फोन पर व्हाट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करना जारी रखा है।

उन्होंने कहा, ‘‘नंबर... 2013-2014 से मेरे पास नहीं है। मैं इस नंबर का इस्तेमाल नहीं करता।’’
न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ‘‘21 अप्रैल, 2014 को नंबर सौंप दिया था।’’
‘द वायर’ ने कहा कि डेटाबेस पर देशभर के जो दर्जनों नम्बर दिखाई देते हैं, उनमें वकीलों के भी नम्बर शामिल हैं, जिसमें से कुछ मानवाधिकार से संबंधित मामलों में शामिल हैं। इनमें से कम से कम दो ऐसे हैं जो हाई प्रोफाइल मुवक्किल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जब उनके नम्बर निगरानी की संभावितों की सूची में दिखाई देते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नीरव मोदी के वकील विजय अग्रवाल को 2018 की शुरुआत में डेटाबेस में जोड़ा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कोई भी फोन फॉरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध नहीं।

दिल्ली के एक अन्य वकील, अल्जो पी जोसेफ का नम्बर 2019 में सूची में शामिल हुआ। वे अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा मामले के सिलसिले में दिसंबर 2018 में भारत में प्रत्यर्पित किए गए कथित ''बिचौलिए'' मिशेल का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह भी बताया गया कि लीक हुए डेटाबेस में से एक नंबर पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के चैम्बर में काम करने वाले कनिष्ठ वकील एम थंगथुराई का भी है। यह नम्बर 2019 में जोड़ा गया था, रोहतगी के अटॉर्नी जनरल के रूप में पद छोड़ने के दो साल बाद।


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