पेटेंट धारकों के अधिकारों से ज्यादा जीवन का अधिकार होना चाहिए: एनएचआरसी प्रमुख

2021-06-22T22:35:36.22

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि पेटेंट धारकों के अधिकारों की अपेक्षा जीवन का अधिकार प्रबल होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में कोविड से संबंधित जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की कमी दूर हो। इसके अलावा निर्धन लोगों को दवाएं और टीके किफायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकें।
एनएचआरसी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार न्यायमूर्ति मिश्रा मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) की एक डिजिटल वैश्विक बैठक को संबोधित कर रहे थे। वह कोविड-19 महामारी को लेकर राज्यों की प्रतिक्रिया से जुड़े एक सत्र में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 के कारण दुनिया को भारी नुकसान हुआ है। समाज में हाशिए पर रहने वाले तबकों के जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए नयी चुनौतियां पैदा हुयी हैं, शिक्षा को नुकसान हुआ है, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है, परिवार बेसहारा हो गए हैं और बच्चे अनाथ हुए हैं।"
उन्होंने कहा कि आयोग परामर्श सहित अपने विभिन्न कदमों के जरिए इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए शासन की प्रणालियों को संवेदनशील बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी मृतकों की गरिमा का भी ख्याल रखता है।

मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ने अपने संक्षिप्त भाषण में कई मुद्दों का जिक्र किया और चिंता जतायी कि ये मानव अधिकारों को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों का भी उल्लेख किया।



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PTI News Agency

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