वयस्क कोविड रोगियों में काम आने वाली अधिकतर दवाएं बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं : स्वास्थ्य मंत्रालय

2021-06-16T17:42:42.557

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) सरकार ने बुधवार को जारी अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि कोविड-19 के वयस्क रोगियों के उपचार में काम आने वाली आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी दवाएं और डॉक्सीसाइक्लिन तथा एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक औषधियां बच्चों के उपचार के लिए अनुशंसित नहीं हैं।

इन आशंकाओं के बीच कि महामारी के मामलों में एक अंतराल के बाद फिर से वृद्धि हो सकती है, सरकार ने बच्चों के लिए कोविड देखरेख केंद्रों के संचालन के वास्ते दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख प्रतिष्ठानों की क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिए।

इनमें कहा गया है कि बच्चों के लिए कोविड रोधी टीके को स्वीकृति मिलने की स्थिति में टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं और जिन्हें कोविड-19 का गंभीर जोखिम हो।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बच्चों के उपचार के बारे में जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वयस्क कोविड रोगियों के उपचार में काम आने वाली अधिकतर दवाएं जैसे कि आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी औषधियां और डॉक्सीसाइक्लिन तथा एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का कोविड-19 से पीड़ित बच्चों पर परीक्षण नहीं किया गया है तथा इसलिए ये बच्चों के उपचार के लिए अनुशंसित नहीं हैं।

इसने कहा, ‘‘लॉकडाउन हटने या स्कूलों के फिर से खुलने के बाद या अगले तीन-चार महीनों में संभावित तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में किसी भी वृद्धि से निपटने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को संयुक्त रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। देखभाल के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।’’
दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि बच्चों की देखरेख के लिए अतिरिक्त बिस्तरों का अनुमान महामारी की दूसरी लहर के दौरान विभिन्न जिलों में संक्रमण के दैनिक मामलों के चरम के आधार पर लगाया जा सकता है।

मंत्रालय ने कहा कि इससे, बच्चों में संक्रमण के मामलों के बारे में और साथ में यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि उनमें से कितने मरीजों को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ेगी।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘कोविड से गंभीर रूप से बीमार बच्चों को देखभाल (चिकित्सा) उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख केंद्रों की क्षमता को बढ़ाना वांछनीय है। इस क्रम में बच्चों के उपचार से जुड़े अतिरिक्त विशिष्ट उपकरणों और संबंधित बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।’’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा-निर्देशों में कहा, ‘‘इसके अतिरिक्त, पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मी-डॉक्टर और नर्स दोनों, उपलब्ध कराए जाने चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों को बच्चों (महामारी से पीड़ित) की उचित देखरेख के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए। बच्चों के अस्पतालों में अलग इंतजाम किए जाने चाहिए, उदाहरण के लिए कोविड-19 से पीड़ित बच्चों की देखरेख के लिए अलग से बिस्तर तैयार किए जाने चाहिए।’’
दिशा-निर्देशों में कहा गया कि वांछनीय है कि बच्चों की देखरेख के लिए कोविड उपचार प्रतिष्ठानों में विशिष्ट क्षेत्र निर्धारित किए जाएं और वहां बच्चों के साथ माता-पिता को ठहरने की अनुमति दी जानी चाहिए।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘मल्टीसिस्टम इनफ्लेमेटरी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों, जिनकी जांच रिपोर्ट गंभीर कोविड के संदर्भ में निगेटिव हो, को मौजूदा बाल रोग उपचार प्रतिष्ठानों द्वारा देखरेख उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इन प्रतिष्ठानों को भी अपनी क्षमता में, खासकर उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) सेवाओं संबंधी क्षमता को मजबूत करना चाहिए।’’
दस्तावेज अवसंरचना, उपकरण और श्रमशक्ति की अतिरिक्त आवश्यकता के बारे में मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है।

यह उल्लेख करते हुए कि कोविड-19 से पीड़ित बच्चों में से ज्यादातर को कोई लक्षण नहीं होते या फिर लक्षण हल्के होते हैं, और उनकी देखभाल माता-पिता द्वारा घर पर ही की जा सकती है, मंत्रालय ने कहा कि लक्षणयुक्त बाल रोगियों के उपचार में बुखार की स्थिति में पैरासीटामोल दवा दी जा सकती है और उनकी श्वसन दर, मुंह से खाना खाने, सांस लेने में कठिनाई और ऑक्सीजन सांद्रता जैसी स्थितियों पर नजर रखी जानी चाहिए।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘सामुदायिक स्तर पर, घर में बच्चों के रोग प्रबंधन तथा यह पता लगाने के लिए आशा कर्मियों और बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्यकर्मियों की मदद ली जा सकती है कि कहीं पीड़ित बच्चों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता तो नहीं।’’
दस्तावेज में सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है और कहा गया है कि समुदाय सहित सभी हितधारकों को सूचना शिक्षा संचार के जरिए शिक्षित किया जाना चाहिए।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘कुछ केंद्रों को कोविड देखरेख एवं अनुसंधान के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में निर्दिष्ट किया जा सकता है। ये केंद्र चिकित्सीय प्रबंधन एवं प्रशिक्षण में नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों तक पहुंच के लिए टेलीमेडिसिन सेवा का सहारा लिया जा सकता है।’’
बच्चों में कोविड बीमारी को लेकर दस्तावेज में सभी स्तरों पर आंकड़े एकत्र करने आदि पर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण व्यवस्था शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘बच्चों में कोविड रोग के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जिसमें प्रबंधन के विभिन्न पहलू शमिल होने चाहिए।’’
इनमें कहा गया है कि सीरो सर्वेक्षण संबंधी रिपोर्ट से पता चलता है कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों में कोरोना वायरस संक्रमण की आवृत्ति वयस्कों जैसी ही होती है, हालांकि महामारी के पुष्ट मामलों में 20 साल से कम आयु के लोगों में 12 प्रतिशत से कम मामले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ‘‘बच्चों में वयस्कों के मुकाबले बीमारी (कोरोना वायरस संक्रमण) की गंभीरता कम होती है। अधिकतर बच्चों में संक्रमण लक्षण विहीन या हल्के लक्षणों वाला होता है। स्वस्थ बच्चों में मध्यम से गंभीर स्तर का संक्रमण असामान्य है।’’


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

सबसे ज्यादा पढ़े गए

PTI News Agency

Recommended News