जगह-जगह हैं गौ सदन, फिर भी सड़कों पर निआश्र्य घूमने पर मजबूर हो रहें पशु

punjabkesari.in Monday, Mar 14, 2022 - 12:19 PM (IST)

सोलन:  हमारे देश में गाय को सिर्फ एक पशु ही नहीं बल्कि मां के समान माना जाता हैं और उसे पूजा भी जाता हैं। लेकिन जब तक वह काम की होती हैं तब तक लोग उन्हें आश्र्य देते हैं, लेकिन जिस दिन वह दूध देना बंद कर देती हैं तो लोग उन्हें सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ देते हैं। सोलन की सड़कों पर कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा हैं, जहां सड़को पर जगह-जगह आवारा पशु घूम रहें हैं जिस कारण लोगों को भी दिक्कतें आ रहीं हैं। आवारा पशुओं को एक आवास मिले इसके लिए प्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रहीं हैं, सड़कों पर गोवंश ना रहे इसके लिए भी सरकार द्वारा अभियान चलाए जा रहें हैं।

वहीं अगर जिला सोलन की बात की जाए तो जिला सोलन में पिछले 1 साल में पशुपालन विभाग द्वारा करीब साढ़े बारह सौ आवारा पशुओं को एनएच गांव और स्टेट हाईवे से उठाकर गौ अभ्यारण में भेजा गया हैं। पशुपालन विभाग सोलन के उपनिदेशक डॉ बीबी गुप्ता ने बताया कि जिला सोलन में 31 ऐसे गौ सदन हैं जिन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा चलाया जा रहा हैं। इन गौ सदनों में करीब 4600 ऐसे पशु हैं जिन्हें सड़कों से उठाकर इन गौ सदनों में रखा गया हैं। उन्होंने बताया कि हर साल पशुपालन विभाग द्वारा यह मुहिम चलाई जाती हैं कि इन आवारा पशुओं को एक आवास मिल सके।

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क्या हैं गौ सदन:  राज्य सरकार गौ वंश योजना के तहत राज्य में गौ सदनों को प्रत्येक गाय प्रतिमाह 500 रुपये की सहायता प्रदान कर रही हैं। सरकार ने लोगों से गौ अभ्यारण्य और गौ सदनों में योगदान देने के लिए आगे आने का आग्रह किया हैं।

डॉ बीबी गुप्ता ने कहा कि बद्दी में गौ अभ्यारण्य खुला हैं जहां पर निराश्रित पशुओं जिन्हें सड़कों पर छोड़ा जाता हैं उन्हें रखा गया हैं। उन्होंने बताया कि इस अभयारण्य को एक संस्था द्वारा चलाया जा रहा हैं जिसकी अध्यक्षता एसडीएम नालागढ़ कर रहें हैं। वहीं उन्होंने लोगों से अपील की हैं कि वे लोग सड़कों पर इन पशुओं को ना छोड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी आवारा पशु मुक्त हिमाचल का सपना देख रहीं हैं ऐसे में जिला सोलन को भी आवारा पशु मुक्त करने के लिए वह लोग विभाग का और सरकार का साथ दें ताकि सड़कों पर गोवंश ना रहें।

 

 


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