खालिस्तान पीस मार्च से पहले SFJ की बड़ी चाल, ट्रंप को “बोर्ड ऑफ पीस” का सदस्य बनाने के लिए 1 अरब की पेशकश

punjabkesari.in Friday, Feb 06, 2026 - 11:52 PM (IST)

वॉशिंगटन / लंदन, (सरबजीत सिंह बनूड़) : खालिस्तान रिफ्रैंडम मुहिम को लेकर विदेशों में सिख राजनीतिक गतिविधियों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। 11 फरवरी को घोषित “खालिस्तान पीस मार्च” से पहले, भारत में प्रतिबंधित सिख संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ा राजनीतिक दांव खेले जाने की जानकारी सामने आई है।

संगठन ने घोषणा की है कि वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने के लिए 1 बिलियन डॉलर (लगभग 1 अरब रुपये) की पेशकश करने को तैयार है। इस संबंध में तैयार किए गए दस्तावेज ट्रंप तक सौंपने की तैयारी भी पूरी होने का दावा किया जा रहा है।

SFJ की ओर से अमेरिकी प्रशासन से यह अपील भी की गई है कि वह भारत सरकार के साथ खालिस्तान जनमत संग्रह के मुद्दे पर बातचीत करे और भारतीय संघ के अंतर्गत आने वाले पंजाब में जनमत संग्रह करवाने के लिए दबाव बनाए।

उल्लेखनीय है कि सिख्स फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कराची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वॉशिंगटन से वीडियो लिंक के माध्यम से यह पेशकश रखी थी। उन्होंने दावा किया कि भारतीय पंजाब में तनाव लगातार बढ़ रहा है और हालिया समय में बड़ी संख्या में सिखों की गिरफ्तारियां हुई हैं। पन्नू ने कहा कि खालिस्तान के लिए वोटिंग के जरिए कराया गया जनमत संग्रह ही तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि SFJ की मुहिम पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाई जा रही है तथा अब तक दुनिया भर में 20 लाख से अधिक सिख जनमत संग्रह की वोटिंग में हिस्सा ले चुके हैं।

दूसरी ओर, भारत सरकार लगातार खालिस्तान की मांग को खारिज करती रही है और इससे पहले SFJ को आतंकी संगठन घोषित कर चुकी है। ऐसे में इस मामले से जुड़ी हर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधि नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे रही है।

11 फरवरी को प्रस्तावित खालिस्तान पीस मार्च, बोर्ड ऑफ पीस की पेशकश और ट्रंप तक दस्तावेज पहुंचाने की कोशिश—ये सभी कदम आने वाले समय में इस अभियान की दिशा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले के चलते भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पंजाब की आज़ादी की मुहिम को भी व्यापक स्तर पर बल मिल सकता है।


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Content Editor

Subhash Kapoor

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