13 सीटों के परिणामों से स्पष्ट होगा पंजाब का राजनीतिक परिदृश्य

गुरदासपुर (हरमनप्रीत): 17वें लोकसभा चुनावों के दौरान पंजाब में मतदान का काम सम्पन्न होने के बाद प्रत्याशियों की किस्मत ई.वी.एम. में बंद हो गई है । अब 23 मई को चुनाव मैदान में उतरे इन महारथियों की जीत-हार का फैसला हो जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब में यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है क्योंकि इसके परिणाम न सिर्फ देश की नई सरकार बनाने का फैसला करेंगे बल्कि इससे पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य की तस्वीर भी स्पष्ट होगी। 

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इसके साथ ही इन चुनावों के परिणाम जहां नई पार्टियों के प्रति लोगों के रुझान की तस्वीर पेश करेंगे,वहीं स्पष्ट करेंगे कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान विरोधी गुट का दर्जा पाने से भी वंचित हो गए अकाली दल का ग्राफ कितना बढ़ा-घटा है। आम आदमी पार्टी में हुए राजनीतिक भूकंपों के बाद अब इस पार्टी की क्या स्थिति है? इन चुनावों के दौरान हुए घटनाक्रमों ने पंजाब की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के भविष्य के संबंध में भी कई शंकाएं पैदा की हैं। इनके आधार पर राजनीतिक विश्लेषक यह मान कर चल रहे हैं कि पंजाब की 13 सीटों के चुनाव परिणाम कांग्रेस में भी बड़े भूकंप ला सकते हैं। 

सुखबीर व हरसिमरत की प्रतिष्ठा दाव पर

यह चुनाव शिरोमणि अकाली दल के लिए बहुत अहम है क्योंकि इस बार न सिर्फ इस पार्टी के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और उनकी धर्मपत्नी हरसिमरत कौर बादल की प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है बल्कि इन चुनावों में पार्टी के 10 प्रत्याशियों की जीत-हार यह स्पष्ट करेगी कि इस समय इस बड़ी पंथक पार्टी की राजनीतिक स्थिति क्या है? पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान मिली करारी पराजय के बाद यह पार्टी पांवों पर आने की बजाय कई विवादों और संकटों में उलझती चली आ रही है। इस पार्टी के दिग्गज नेता सुखदेव सिंह ढींडसा के बाद सेवा सिंह सेखवां, रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और डा. रतन सिंह अजनाला जैसे कई बड़े नेताओं के इस पार्टी से अलग हो जाने के बाद यह पहला चुनाव है जिस दौरान सुखबीर सिंह बादल खुद भी चुनाव मैदान में उतरे हैं। अगर इन चुनावों के दौरान पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो इससे पूरे पंजाब में पार्टी में नई जान डालने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, दूसरी तरफ अगर पार्टी को इन चुनावों में भारी समर्थन नहीं मिलता तो आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व को विशेषकर सुखबीर सिंह बादल को अपने राजनीतिक सिद्धांतों में परिवर्तन करने संबंधी विचार करना पड़ेगा। 

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भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा

3 सीटों पर चुनाव लड़ रही भाजपा के लिए भी यह चुनाव अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। अगर भाजपा के प्रत्याशी जीतते हैं तो नि:संदेह पंजाब में भाजपा का ग्राफ ऊंचा जाएगा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक का सियासी कद भी बढ़ेगा, मगर घटिया कारगुजारी  बड़े अपमान से कम नहीं होगी। विशेषकर गुरदासपुर सीट भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है जहां फिल्मी दुनिया के बादशाह सन्नी देओल को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा ने विनोद खन्ना के गढ़ को फिर से फतह करने की रणनीति बनाई थी। 

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‘आप’ ने लड़ी है अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई

आम आदमी पार्टी ने एक तरह से यह चुनाव अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़ा है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान जब पंजाब वासियों ने ‘आप’ के 4 प्रत्याशियों को जिताकर इतिहास बनाया था तो ‘आप’ को 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी इस राज्य से कई आशााएं थीं जिसके अंतर्गत यह पार्टी अकाली दल को पछाड़ कर विरोधी पक्ष का दर्जा तो हासिल करने में सफल हो गई मगर बाद में लगातार बिखरती गई। इस पार्टी के वालंटियर्ज ने तो क्या रहना था बल्कि इसके कई विधायक और एम.पी. भी इसका साथ छोड़ गए। अब इन चुनावों के दौरान अगर यह पार्टी अच्छा प्रदर्शन न कर सकी तो इस राज्य में भी इसका भविष्य धुंधलाने से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अंतर्गत न सिर्फ आम आदमी पार्टी का अस्तित्व बल्कि इसके प्रदेश प्रधान भगवंत सिंह मान समेत अन्य नेतृत्व का राजनीतिक भविष्य भी दाव पर लगा दिखाई दे रहा है।

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कांग्रेस में सियासी धमाके कर सकते हैं चुनाव नतीजे 

पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व के लिए इन चुनावों के परिणाम जहां केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी साख बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं वहीं चुनाव परिणाम से पंजाब में कांग्रेस की राजनीतिमें सियासी धमाके भी हो सकते हैं। सियासी विश्लेषकों के अनुसार इन चुनावों के नतीजे कैप्टन सरकार के कार्यकाल के करीब सवा 2 वर्षों के संबंध में लोगों के रुझान को भी स्पष्ट करेंगे। इसलिए अगर लोग कांग्रेस के पक्ष में आशानुसार फतवा नहीं देते तो सीधे-सीधे कैप्टन सरकार की कारगुजारी पर शंका पैदा होनी स्वाभाविक है। विशेषकर अब जबकि कैप्टन ने अच्छी कारगुजारी न दिखाने की स्थिति में सिर्फ इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है तो जिस तरीके से नवजोत सिंह सिद्धू की धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने 13 की 13 सीटें जीतने संबंधी व्यंग्यपूर्ण प्रतिक्रिया दी है वह कई तरह के संकेत देती है।

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इसके साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा चुनाव प्रचार के अंतिम समय बठिंडा में बेअदबी के आरोपियों की सजाओं संबंधी टिप्पणी करते हुए अपने त्याग पत्र का किया गया इशारा भी आने वाले समय में कांग्रेस के लिए परेशानियां पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं, प्रताप सिंह बाजवा भी व्यंग्यात्मक शैली में यह कह चुके हैं कि कै. अमरेन्द्र सिंह हाईकमान को लिखित रूप में 13 की 13 सीटें जिताने का भरोसा दे चुके हैं इसलिए अगर चुनाव परिणामों में कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक लोगों का समर्थन न मिला तो यह चुनाव परिणाम कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को बड़े स्तर पर प्रभावित करेंगे। 

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