होली 2026: “अवध में होरी, बृज में होरी” से सजा त्योहार, राजीव आचार्य का गीत बना सोशल मीडिया सेंसेशन

punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 02:09 PM (IST)

डेस्क : होली के रंगों के बीच इस साल संगीत का एक नया रंग भी घुल गया है। भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके गायक राजीव आचार्य का ताज़ा होली गीत “अवध में होरी, बृज में होरी” इन दिनों चर्चा में है। देश की प्रमुख म्यूज़िक कंपनी टी-सीरीज़ द्वारा रिलीज़ किया गया यह गीत रिलीज़ के साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से आगे बढ़ा है। कुछ ही समय में इसे 15 लाख से अधिक व्यूज़ मिल चुके हैं।

अवध और बृज की होली का अनोखा संगम

इस गीत की सबसे खास बात इसकी थीम है। जहां अधिकांश होली गीत बृज की राधा-कृष्ण परंपरा पर केंद्रित होते हैं, वहीं “अवध में होरी, बृज में होरी” में भगवान राम की अयोध्या और राधा-कृष्ण की बृजभूमि—दोनों को एक साथ जोड़ा गया है। अवध की मर्यादा और भक्ति भाव के साथ बृज की रास-लीला और प्रेम रंग को मिलाकर एक नया संगीत प्रयोग किया गया है। यही अनूठापन इसे इस साल के होली गीतों में अलग पहचान दिला रहा है।

बोल और संगीत ने बढ़ाया आकर्षण

गीत के बोल सुरभि ने लिखे हैं, जिनमें पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। शब्द सरल हैं, लेकिन भाव गहरे। वहीं संगीतकार आकाश रिज्जा ने लोकधुनों और आधुनिक म्यूजिक प्रोडक्शन का संतुलित मिश्रण पेश किया है। ढोलक और पारंपरिक ताल के साथ आधुनिक बीट्स का संयोजन इसे त्योहार के अनुकूल ऊर्जा देता है।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यह गीत तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पर 500 से ज्यादा रील इस गीत पर बन चुकी हैं। होली पार्टियों, स्कूल-कॉलेज कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में यह गीत बजता सुनाई दे रहा है। युवाओं के साथ-साथ परिवारों में भी इसे पसंद किया जा रहा है।

पहले भी दे चुके हैं हिट भजन

राजीव आचार्य इससे पहले भी कई लोकप्रिय भजन दे चुके हैं। “हे मेरे राम” , “धर्म ध्वजा मेरे साथ थाम लो”, अवध दुलारे राम सुनो, माधो माधो, चलो फिर से अयोध्या नगरिया जैसे भजन श्रोताओं ने बहुत पसंद किए जा रहे है । उनकी आवाज़ में भक्ति और सरलता का ऐसा मेल है, जो श्रोताओं को सहज रूप से जोड़ लेता है।

होली जैसे पारंपरिक पर्व पर “अवध में होरी, बृज में होरी” का यह नया अंदाज़ दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं और नए प्रयोगों के साथ भी परंपरा को जीवंत रखा जा सकता है। इस बार रंगों के साथ यह गीत भी होली के जश्न का अहम हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।


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Content Editor

Mehak