ओसवाल एनर्जीज के रतन बोकाडिया भारत की क्लीन एनर्जी दिशा को दे रहे नई रफ्तार
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 04:22 PM (IST)
(वेब डेस्क): भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव लाने की दिशा में 'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है। यह कंपनी अपनी ग्रोथ को भारत सरकार के उस लक्ष्य के साथ जोड़कर देख रही है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कार्बन गैसों को कम करना और 'नेट-जीरो' का लक्ष्य पाना है। साल 2024 में कंपनी ने अपना नाम 'ओसवाल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' से बदलकर 'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' कर लिया। यह बदलाव केवल नाम का नहीं है, बल्कि यह क्लीन और सस्टेनेबल एनर्जी सॉल्यूशन्स पर कंपनी के बढ़ते फोकस और उसकी नई पहचान को दिखाता है।
ऑयल और गैस के सेक्टर में एक दशक से भी ज्यादा का एक्सपीरिएंस रखने वाली 'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' अब इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) के क्षेत्र में अपनी एक्सपर्टीज का विस्तार कर रही है। कंपनी अब बहुत तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन मैनेजमेंट, कचरे से एनर्जी बनाने और ग्रीन अमोनिया जैसे सेक्टर में कदम बढ़ा रही है। भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ये सभी बहुत जरूरी हैं।
इस बड़े बदलाव के पीछे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रतन बोकाडिया का बढ़ा हाथ है, जो इस पूरी परिवर्तन यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कंपनी को कन्वेंशनल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर से बाहर निकालकर भविष्य के टिकाऊ और मॉडर्न ऊर्जा समाधानों की ओर मोड़ने में बहुत अहम भूमिका निभाई है। इंडस्ट्री में 25 साल से भी ज्यादा का एक्सपीरिएंस रखने वाले रतन बोकाडिया ने ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड को एक ऐसी ऑर्गेनाइजेशन के रूप में तैयार किया है जो भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है और भारत की लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी में अपना कीमती योगदान दे रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ते कदम
कंपनी की सबसे बड़ी पहलों में से एक 320 करोड़ रुपये का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट है। इसके तहत ओसवाल एनर्जीज एडवांस्ड 'इलेक्ट्रोलाइजर' टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 20 मेगावाट (MW) तक हाइड्रोजन प्रोडक्शन कैपेसिटी विकसित करने का प्लान बना रही है। यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के साथ पूरी तरह मेल खाता है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता कम करना और हैवी इंडस्ट्रीज से होने वाले पॉल्यूशन को खत्म करना है।
ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड ने अपने ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पहला 'इलेक्ट्रोलाइजर स्टैक' हासिल कर लिया है। यह मशीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन की सुविधा शुरू करने के लिए सबसे जरूरी है। कंपनी अब अपने अलग-अलग साइट्स पर अपनी हाइड्रोजन यूनिट्स को चालू करने की तैयारी में है। ये प्लांट उन इंडस्ट्रीज के लिए बेहद मददगार साबित होंगे जो क्लीन फ्यूल के ऑप्शन तलाश रहे हैं। खासतौर पर केमिकल, खाद (फर्टिलाइजर) और ट्रांसपोर्ट (Mobility) जैसे फील्ड में यह ग्रीन हाइड्रोजन एक बड़े बदलाव का आधार बनेगी।
टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड अपनी रणनीतिक भागीदारी को भी मजबूत कर रही है। कंपनी ने हाल ही में कई अहम समझौते (MoUs) किए हैं, जिनमें दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के साथ किया गया करार बेहद अहम है। इस समझौते के तहत ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और मेथेनॉल के साथ-साथ बड़े लेवल पर खारे पानी को साफ करने (डिसैलिनेशन) का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद पर्यावरण के अनुकूल फ्यूल के लिए एक मजबूत सिस्टम तैयार करना और समुद्री व्यापार (मैरीटाइम) के क्षेत्र में प्रदूषण को कम करना है।
कंपनी भविष्य की तकनीकों पर भी तेजी से काम कर रही है, जिसमें कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) जैसी टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यह खतरनाक कार्बन गैसों को सोखकर उन्हें वातावरण में फैलने से रोकती है। इसके अलावा प्लाज्मा-बेस्ड वेस्ट-टू-एनर्जी सॉल्यूशन पर भी ध्यान दे रही है। इसकी मदद से नगर पालिकाओं और बड़े इंडस्ट्रीज को कूड़ा-कचरा डंप करने (लैंडफिल) की समस्या से मुक्ति मिलेगी और साथ ही उस कचरे से साफ-सुथरी बिजली पैदा की जा सकेगी।
पर्यावरण के प्रति समर्पित लीडरशिप
रतन बोकाडिया की लीडरशिप में 'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' ने अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने कंपनी के बिजनेस मॉडल में ESG (पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट गवर्नेंस) को सबसे ऊपर रखा है। जिसमें बिजनेस स्ट्रेटजी, प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और स्टेकहोल्डर्स इंगेजमेंट में स्थिरता को इंटीग्रेट किया गया है। उनका मानना है कि इंजीनियरिंग की कुशलता तभी सार्थक है जब वह एनवायरमेंट के प्रति जिम्मेदारी के साथ जुड़ी हो।
अपनी इसी सोच को साझा करते हुए बोकाड़िया ने कहा है, "भारत का नेट जीरो एमिशन की ओर बढ़ता सफर हमारे लिए एक जनरेशन में एक बार मिलने वाला ऐतिहासिक मौका है। ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड में हम ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पूरी तरह कमिटेड हैं, जो न केवल देश की तरक्की की रफ्तार बढ़ाए, बल्कि हमारी धरती को सुरक्षित रखने में भी मदद करे।"
प्रगति की नई राह
'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' का अब तक का सफर बेहद शानदार रहा है। कंपनी ने दुनिया भर में 250 से भी ज्यादा प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे मार्केट में उसकी पहचान सेफ्टी, क्वालिटी और समय पर काम पूरा करने वाली कंपनी के रूप में बनी है। हालांकि, तेल और गैस के सेक्टर में इंजीनियरिंग और निर्माण (EPC) का काम आज भी कंपनी की मजबूती का आधार है, लेकिन अब 'क्लीन एनर्जी' से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे कंपनी की भविष्य की कमाई और विकास के रास्ते और भी साफ हो गए हैं।
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड का यह रणनीतिक बदलाव एक मिसाल की तरह है। यह दिखाता है कि कैसे पुरानी और ट्रेडिशनल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां अपनी तरक्की से समझौता किए बिना एनवायरमेंट की सुरक्षा और स्थिरता की ओर सफलतापूर्वक कदम बढ़ा सकती हैं।
भविष्य की ओर कदम
जैसे-जैसे भारत लो कार्बन इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ रहा है, 'ओसवाल एनर्जीज लिमिटेड' खुद को इस नए दौर के एक भरोसेमंद ईपीसी पार्टनर के रूप में स्थापित कर रही है। ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन मैनेजमेंट और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को अपना मुख्य आधार बनाकर, कंपनी भारत सरकार के साल 2070 तक 'नेट-जीरो' (शून्य उत्सर्जन) के टारगेट को हासिल करने में सक्रिय रूप से मदद कर रही है।
