Vitamin D Side Effects: खतरे की घंटी- शरीर में Vitamin D कम होने पर किन बीमारियों का रहता है खतरा?

punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 04:04 PM (IST)

Vitamin D Side Effects: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बंद कमरों वाले वर्क कल्चर के कारण हमारे शरीर को प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार—विपरित परिस्थितियों से लड़ने वाला विटामिन D- पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। जिसे हम अक्सर 'सनशाइन विटामिन' कहते हैं, वह केवल एक पोषक तत्व नहीं बल्कि हमारे शरीर के भीतर एक हार्मोन की तरह काम करता है। हालिया स्वास्थ्य चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि दुनिया की एक बड़ी आबादी अनजाने में ही विटामिन D की कमी से जूझ रही है, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों की नींव रख सकती है।

क्यों है यह शरीर के लिए 'पावर हाउस'?

विटामिन D का प्राथमिक कार्य शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करना है। यदि आपके रक्त में इस विटामिन की कमी है, तो आप कितना भी कैल्शियम युक्त आहार क्यों न लें, आपकी हड्डियां उसे सोख नहीं पाएंगी। नतीजा? हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर होने लगती हैं।

किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

येल मेडिसिन (Yale Medicine) के शोध बताते हैं कि विटामिन D की कमी किसी खास उम्र तक सीमित नहीं है। हालांकि, कुछ वर्ग अधिक संवेदनशील हैं:

  • नवजात शिशु: जो बच्चे केवल स्तनपान पर निर्भर हैं, उन्हें अक्सर मां के दूध से पर्याप्त विटामिन D नहीं मिल पाता। ऐसे में डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह देते हैं।

  • बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ हमारी त्वचा की सूरज की रोशनी से विटामिन D बनाने की क्षमता घटने लगती है।

  • गहरे रंग की त्वचा वाले लोग: त्वचा में मौजूद मेलेनिन सूरज की किरणों के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे विटामिन D बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

  • मरीज: किडनी, लिवर या जेनेटिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों में भी इसका स्तर गिर सकता है।

खतरे की घंटी: शरीर देता है ये संकेत

विटामिन D की कमी रातों-रात पता नहीं चलती, लेकिन शरीर कुछ इशारे जरूर करता है। यदि आप लगातार थकान महसूस करते हैं:-
-हड्डियों और पीठ में दर्द रहता है।
-मांसपेशियों में ऐंठन।
-हाथों-पैरों में झुनझुनी का अनुभव होता है, तो यह विटामिन D के गिरते स्तर का संकेत हो सकता है। गंभीर स्थिति में हड्डियां इतनी नाजुक हो जाती हैं कि हल्की चोट से भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 

बचाव और समाधान का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमी को दूर करना असंभव नहीं है। प्रतिदिन 15-20 मिनट की गुनगुनी धूप, संतुलित आहार (जैसे फैटी फिश, अंडे की जर्दी और फोर्टिफाइड फूड्स) और नियमित व्यायाम इसमें सहायक हैं। यदि टेस्ट में विटामिन D का स्तर बहुत कम आता है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लेना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News