Work From Home का डार्क साइड: युवाओं में बढ़ रहा है अकेलापन और चिड़चिड़ापन, 5.8 लाख कर्मियों पर हुआ बड़ा खुलासा
punjabkesari.in Monday, Jun 08, 2026 - 07:58 AM (IST)
Side Effects of Work From Home: घर बैठे काम करने (work from home) वालों के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। work from home करने वालों की लाइफस्टाइल अब युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जरनल 'साइंस' (Science) में प्रकाशित एक बड़े शोध के अनुसार, रिमोट वर्क करने वाले कर्मचारियों में तनाव, चिड़चिड़ापन और अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह रिसर्च अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी (Yale University) के समाजशास्त्र विभाग की शोधकर्ता एम्मा जांग और रूरके ओ'ब्रायन द्वारा की गई है। इस अध्ययन में 5.80 लाख से अधिक अमेरिकी कर्मचारियों के डेटा का विश्लेषण किया गया।
रिसर्च से सामने आईं 5 बड़ी और चौंकाने वाली बातें
-अकेलेपन का बढ़ता दायरा: घर से काम करने वाले लोग हर वर्किंग डे में औसतन 1.1 घंटा अतिरिक्त समय अकेले बिता रहे हैं।
-ऑफिस न जाने की वजह से कर्मचारियों के पूरे दिन घर के अंदर ही बंद रहने की संभावना 4 गुना तक बढ़ गई है।
-रिमोट वर्कर कई-कई दिनों तक किसी बाहरी व्यक्ति से आमने-सामने बात नहीं कर पाते हैं।
-अपनी भावनाओं को साझा न कर पाने के कारण वे अंदर ही अंदर घुट रहे हैं।
-दिनभर लैपटॉप स्क्रीन के सामने बैठे रहने और बैक-टू-बैक ऑनलाइन मीटिंग्स के बोझ ने युवाओं को मानसिक रूप से थका दिया है।
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की जरूरत: ऑफिस जाकर काम करने वालों की तुलना में, घर से काम करने वाले कर्मचारियों को मानसिक तनाव के कारण काउंसलर या साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) के पास अधिक जाना पड़ रहा है।
क्या कहता है शोध?
युवाओं में बढ़ रही मानसिक परेशानियों और चिड़चिड़ेपन के पीछे लगभग एक-तिहाई (33%) वजह सिर्फ रिमोट वर्क यानी वर्क फ्रॉम होम है। हालांकि इससे जॉब सेटिस्फेक्शन (नौकरी से संतुष्टि) तो मिलती है, लेकिन यह एंग्जायटी और डिप्रेशन की वजह भी बन रहा है।
भारत में भी हालात चिंताजनक
यह समस्या सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) और निमहंस (NIMHANS) जैसे प्रमुख संस्थानों की स्टडीज बताती हैं कि भारत के आईटी (IT), सॉफ्टवेयर और बीपीओ (BPO) सेक्टर में भी स्थिति डराने वाली है। भारतीय रिमोट वर्किंग प्रोफेशनल्स पर हुए सर्वे के आंकड़े इस प्रकार हैं:-
मानसिक स्थिति प्रभावित कर्मचारियों का प्रतिशत
अकेलापन महसूस होना 35%
वास्तविक दुनिया/समाज से कटाव 47%
सामाजिक मेलजोल पूरी तरह खत्म होने के कारण भारतीय युवा भी तेजी से एंग्जायटी (चिंता) और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि काम के साथ-साथ पर्सनल लाइफ और सोशल लाइफ का बैलेंस बिगड़ना ही इस चिड़चिड़ेपन की मुख्य वजह है।
