Budget 2026: क्या 1 फरवरी के बाद स्मार्टफोन की कीमतों में आएगा बदलाव? जानिए एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 01:40 PM (IST)
नेशनल डेस्क: साल 2026 का बजट आने वाला है और स्मार्टफोन यूजर्स के लिए यह सवाल अहम बन गया है कि बजट के बाद क्या मोबाइल की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी। स्मार्टफोन अब लग्ज़री नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, इसलिए कीमतों में कोई भी बदलाव सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगा।
पिछले साल की स्थिति
पिछले साल भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में कई नए ब्रैंड्स ने एंट्री की, जिससे चीनी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिली। जहां कुछ चीनी कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखीं, वहीं सैमसंग ने साल के अंत में कुछ मॉडल्स की कीमतें बढ़ा दी। इससे सवाल उठता है कि क्या बजट आने के बाद कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिवाइसों की बढ़ती मांग की वजह से मेमोरी चिप्स और दूसरे जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो गई है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है और स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ गई है।
हालांकि कंपनियां कीमतें बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा रही हैं, क्योंकि इससे मार्केट की डिमांड पर असर पड़ सकता है। रियलमी के पूर्व CEO माधव सेठ के अनुसार, AI इंटीग्रेटेड स्मार्टफोन की मांग बढ़ने की वजह से कीमतों में धीरे-धीरे इजाफा हुआ है।
स्मार्टफोन इंडस्ट्री को किन चीजों पर ध्यान देना चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और अन्य जरूरी पार्ट्स घरेलू रूप से बनाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट, सिस्टम डिज़ाइन और सॉफ्टवेयर-आधारित इनोवेशन पर भी जोर देना होगा।
अभी भारत में ज्यादातर स्मार्टफोन असेंबल होते हैं, लेकिन जरूरी पार्ट्स अभी भी इंपोर्ट किए जाते हैं। अगर बजट में टारगेटेड टैक्स इंसेंटिव और पॉलिसी सपोर्ट मिल जाए, तो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे लागत कंट्रोल करना आसान होगा और लंबी अवधि में कीमतें स्थिर या कम हो सकती हैं।
क्या उम्मीद की जा सकती है
ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव की वजह से तुरंत बड़ी कटौती की संभावना कम है। लेकिन यूनियन बजट द्वारा तय की गई दिशा यह तय करने में अहम होगी कि भविष्य में स्मार्टफोन महंगे होंगे या सस्ते। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का समर्थन और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के कदम कीमतों को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं।
