ऑफ द रिकॉर्डः किसके सिर फूटेगा दिल्ली में भाजपा की हार का ठीकरा?

2020-02-19T11:08:27.797

नेशनल डेस्कः अमित शाह दिल्ली चुनावों के शुभंकर हो सकते हैं लेकिन केवल 8 सीटों पर सिमटी भाजपा की शर्मनाक हार की जिम्मेदारी किसी न किसी को तो लेनी ही होगी। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इस हार के लिए किसे बलि का बकरा बनाया जाएगा? 
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यदि सत्ता के गलियारों में चल रही कानाफूसी पर भरोसा किया जाए तो इस हार के लिए एक नहीं बल्कि 2 लोगों को दोषी ठहराया जाएगा। पहले हैं भोजपुरी गायक-अभिनेता से नेता बने मनोज तिवारी जिन्हें शाह ने खुद दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए चुना था, दूसरे दिल्ली चुनावों के प्रभारी एवं सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर हो सकते हैं। क्योंकि किसी भी नेता की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह पार्टी की हार के लिए अमित शाह के धु्रवीकरण वाले भाषणों और उनके प्रयोगों को जिम्मेदार ठहराए, ऐसे में उक्त दोनों पर गाज गिरने की संभावना है। जावड़ेकर को एक बुरे शकुन के तौर पर देखा जा रहा है। 
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जावड़ेकर ने जहां-जहां चुनावों की प्रभारी के तौर पर अध्यक्षता की है वहां-वहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। 2018 में जावड़ेकर कर्नाटक विधानसभा चुनावों के प्रभारी थे, जहां भाजपा थोड़े अंतर से सत्ता से वंचित रह गई। उसके बाद उन्हें राजस्थान विधानसभा चुनावों का प्रभारी बनाया गया और वहां भी भाजपा कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार गई। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने जावड़ेकर को दिल्ली के चुनावों का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी लेकिन कहावत है कि बॉस कभी गलत नहीं होता। 
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इस हार के पीछे भी एक कहानी है। चुनाव परिणाम आने से 24 घंटे पहले तक अमित शाह इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि दिल्ली में भाजपा 41 सीटें जीतेगी। सभी प्रमुख एग्जिट पोल करने वालों से उनके निष्कर्ष को लेकर सवाल पूछे गए। भाजपा ने देरी से हुई वोटिंग का बहाना बनाते हुए कहा कि एग्जिट पोल 3 बजे के पहले की वोटिंग के आधार पर किए गए थे।
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जब चुनाव परिणाम घोषित हुआ तो वरिष्ठ और बड़बोले मंत्री छिप गए। रवि शंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी तथा प्रकाश जावड़ेकर गायब थे। सुधांशु त्रिवेदी और शाहनवाज हुसैन जैसे लोग पार्टी का बचाव करने की कोशिश करते देखे गए। दिल्ली भाजपा के नेता इस बात से चिढ़े हुए हैं कि विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज कर  बाहरी  लोगों  को  चुनाव प्रभारी बनाया गया।


Pardeep

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