जानिए कौन हैं एच.एस. फुल्का और आखिर 40 साल बाद क्यों चुना BJP का रास्ता? पंजाब के हालातों पर कही ये बात
punjabkesari.in Wednesday, Apr 01, 2026 - 04:03 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पंजाब से लेकर दिल्ली की सियासत में उस समय हलचल वाला माहौल बन गया, जब सीनियर अधिवक्ता और मानवाधिकारों के सजग प्रहरी एच.एस. फुल्का ने BJP का दामन थामा है। भाजपा में शामिल होने के बाद फुल्का ने अपने इस फैसले के पीछे के गहरे कारणों और पंजाब ती वर्तमान स्थिति पर अपनी चिंताएं साझा कीं।
न्याय की लड़ाई और भाजपा का साथ
फुल्का ने बताया कि 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का उनका संघर्ष पिछले चार दशकों से जारी है। उन्होंने याद किया कि इस लंबी कानूनी लड़ाई में उन्हें मदन लाल खुराना, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे दिग्गज भाजपा नेताओं का हमेशा समर्थन मिला। फुल्का का कहना है कि बीजेपी के साथ बहुत पहले से उनका वैचारिक जुड़ाव है उन्होंने कई कानूनी पेचीदगियों में पार्टी के साथ मिलकर काम भी किया है।
'आप' से मोहभंग के बाद की BJP वापसी
फुल्का ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बेशक वे साल 2014 से 2017 तक आप पार्टी का हिस्सा रहे, लेकिन हमेशा लगा कि उनकी कार्यशैली और विचार भाजपा के साथ अधिक मेल खाते हैं। उन्होंने कहा, "मेरा सबसे पुराना और करीबी रिश्ता भाजपा के साथ ही रहा है, इसलिए यह एक तरह से मेरी घर वापसी है।"

पंजाब के बिगड़ते हालातों पर भी जताई चिंता
पंजाब की वर्तमान स्थिति पर फुल्का ने तीखा हमला बोलते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि राज्य में जबरन वसूली (Extortion) के मामले बढ़ रहे हैं और व्यापारियों को धमकियां मिल रही हैं। वसूली के अलावा पंजाब का युवा नशे की गिरफ्त में है, जिससे सामाजिक ढांचा कमजोर हो रहा है। इसी के साथ उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल संरक्षण और खेती के तरीकों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगले 13-14 वर्षों में पंजाब की उपजाऊ जमीन बंजर हो सकती है।
राज्य सरकार पर साधा निशाना
फुल्का ने आरोप लगाया कि पंजाब की वर्तमान सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं और गिरती कानून-व्यवस्था के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इन्हीं मुद्दों को सुलझाने और पंजाब के भविष्य को बचाने के लिए उन्होंने फिर से सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और इसके लिए उन्हें भाजपा से बेहतर कोई विकल्प नजर नहीं आया।
