बारासात अस्पताल में मौत से हड़कंप! Nipah से उबरी 25 साल की नर्स की अचानक कार्डियक अरेस्ट से मौत
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 07:13 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बारासात के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही 25 वर्षीय महिला नर्स की गुरुवार (12 फरवरी 2026) दोपहर लगभग 4:20 बजे मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उनकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) के कारण हुई।
हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि वह निपाह वायरस संक्रमण से उबर चुकी थीं, लेकिन लंबे समय तक गंभीर अवस्था में रहने और कई जटिलताओं के कारण उनकी सेहत लगातार नाजुक बनी हुई थी।
जनवरी में हुई थी Nipah Virus की पुष्टि
मृतका पूर्वी बर्दवान जिले के कटवा की रहने वाली थीं और बारासात के उसी निजी अस्पताल में कार्यरत थीं, जहां इस वर्ष की शुरुआत में निपाह संक्रमण के मामले सामने आए थे।जनवरी 2026 के शुरुआती दिनों में उनकी रिपोर्ट निपाह पॉजिटिव आई थी। संक्रमण की पुष्टि के बाद उन्हें पहले बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर बाद में उन्हें उसी निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया जहां वह कार्यरत थीं। लंबे समय तक उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। जनवरी के अंतिम सप्ताह में वेंटिलेटर हटाया गया, लेकिन वह गहरे कोमा की स्थिति में रहीं।
कोमा और सेकेंडरी इन्फेक्शन ने बढ़ाई मुश्किलें
लंबे समय तक कोमा में रहने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बेहद कमजोर हो गई थी। इसी दौरान उनके फेफड़ों में नोसोकोमियल यानी अस्पताल में होने वाला सेकेंडरी इन्फेक्शन भी हो गया।
चिकित्सकों के मुताबिक, इन जटिलताओं ने उनके शरीर को काफी कमजोर कर दिया था। गुरुवार को अचानक उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
कैसे फैला संक्रमण?
इस वर्ष जनवरी में बारासात के इसी अस्पताल में दो नर्सिंग स्टाफ—एक पुरुष और एक महिला—निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए थे। पुरुष नर्स उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। प्रारंभिक जांच में संक्रमण को ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन से जुड़ा माना गया, जो संक्रमित व्यक्ति के स्राव जैसे लार आदि के संपर्क से फैल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग और WHO की प्रतिक्रिया
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि फिलहाल कोई नया मामला सामने नहीं आया है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जनवरी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इन मामलों की पुष्टि की थी और जोखिम को सब-नेशनल स्तर पर “मॉडरेट” श्रेणी में रखा था।
हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए बढ़ी चिंता
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि निपाह जैसे गंभीर और जानलेवा वायरस से हेल्थकेयर वर्कर्स को कितना बड़ा जोखिम रहता है। संक्रमण से उबरने के बाद भी जटिलताएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में संक्रमण नियंत्रण, आइसोलेशन प्रोटोकॉल और ICU मॉनिटरिंग बेहद अहम होती है।
