तमिलनाडु में विजय की सरकार का पहला बजट पेश, महिलाओं को स्वर्ण उपहार का प्रावधान
punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 08:34 PM (IST)
नेशनल डेस्क : तमिलनाडु की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार की ओर से बुधवार को पेश किए गए पहले बजट की विपक्ष ने संयुक्त रूप से कड़ी आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने एक सुर में कहा कि यह बजट मुख्य चुनावी वादों को पूरा करने के बजाय मौजूदा योजनाओं के नाम बदलने पर अधिक केंद्रित है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), अन्नाद्रमुक, डीएमडीके, पीएमके और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जैसे विपक्षी दलों ने चुनाव घोषणापत्र के अहम वादों पर सरकार की चुप्पी, राज्य पर बढ़ते कर्ज और कृषि एवं स्कूली शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए कम बजट आवंटन पर गहरी निराशा जताई। नेता प्रतिपक्ष एवं द्रमुक के नेता उदयनिधि स्टालिन ने बजट और सरकार के शुरुआती 100 दिनों को पूरी तरह नाकाम करार दिया। उन्होंने टीवीके सरकार पर पिछली द्रमुक सरकार की योजनाओं पर सिर्फ अपन 'स्टिकर' चिपकाने का आरोप लगाया।
उदयनिधि ने कहा, ''उन्होंने बदलाव का वादा किया था, लेकिन उन्होंने जो एकमात्र बदलाव किया है, वह हमारी योजनाओं का नाम बदलना है।'' उदयनिधि ने आरोप लगाया कि 'अंबु चोलाई' का नाम बदलकर 'एल्डरली सेंटर्स' (बुजुर्ग केंद्र) कर दिया गया है और द्रमुक सरकार की आवास योजना 'कलैगनार कनावु इल्लम' अब 'वेट्री वीडु' हो गई है। उन्होंने स्कूली शिक्षा के लिए बजट को पिछली द्रमुक सरकार के 48,500 करोड़ रुपये से घटाकर 44,500 करोड़ रुपये करने के लिए भी सरकार की कड़ी आलोचना की।
इसके अलावा उन्होंने तंजावुर में विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ पुलिस की हालिया कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की। अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी इन विचारों से सहमति जताते हुए बजट को 'नाकाफी' करार दिया। उन्होंने राज्य की चिंताजनक आर्थिक स्थिति पर जोर देते हुए बताया कि कुल कर्ज बढ़कर 10.98 लाख करोड़ रुपये हो गया है, राजस्व घाटा 55,785 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है और राजकोषीय घाटा 1.21 लाख करोड़ रुपये है।
पलानीस्वामी ने कहा, ''इस सरकार के सत्ता संभालने के बाद से 85 दिनों में एक भी नई योजना शुरू नहीं की गई है। उन्होंने अपने चुनावी वादों को पूरी तरह से नजरअंदाज़ कर दिया है, जिनमें महिलाओं के लिए 2,500 रुपये की मासिक सहायता, छह मुफ्त रसोई सिलेंडर, 3,000 रुपये की वृद्धा पेंशन और कृषि ऋण पूरी तरह माफ किया जाना शामिल है।'' पीएमके नेता सौम्या अंबुमणि ने इस बात पर निराशा जताई कि खेती-बाड़ी के लिए एक प्रतिशत से भी कम बजट आवंटित किया गया।
उन्होंने कहा, ''किसान सहकारी फसल ऋण पूरी तरह माफ किए जाने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें बहुत निराशा हुई।'' आलोचना के बावजूद बजट में कुछ खास प्रशासनिक पहलों की थोड़ी-बहुत तारीफ भी हुई। भकपा नेता टी. रामचंद्रन ने शिक्षा के लिए कुल 53,000 करोड़ रुपये के आवंटन और 21,000 करोड़ रुपये की एकीकृत सड़क विकास परियोजना की तारीफ की, लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 'झूठी शान की खातिर हत्या' के खिलाफ एक विशेष कानून पारित करने और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की अपील की। एमएमके ने दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी कायद-ए-मिल्लत के नाम पर राज्य का एक पुरस्कार शुरू करने के फैसले का स्वागत किया।
