कांग्रेस के दिग्गज नेता रमिंदर आवला अकाली दल में हुए शामिल

punjabkesari.in Sunday, Oct 25, 2026 - 09:42 PM (IST)

सुखबीर बादल ने पहनाया सिरोपा, बोले, 2027 में जीत पक्की करेंगे

चंडीगढ़, 25 अक्तूबर (अर्चना) :
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जलालाबाद के पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला रविवार को शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सुखबीर बादल ने उन्हें सिरोपा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया।

सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा कर आवला का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जलालाबाद ने उन्हें तीन बार क्षेत्र की सेवा करने का अवसर दिया और अकाली सरकारों के कार्यकाल में यहां क्रांतिकारी विकास कार्य हुए। बादल ने विश्वास जताया कि रमिंदर सिंह आवला के पार्टी में शामिल होने से जलालाबाद सहित पूरे बॉर्डर बैल्ट में अकाली दल को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि आवला के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्र में विकास के उसी मॉडल को दोबारा आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। बादल ने 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए मिलकर काम करने की बात भी कही। वहीं आवला ने कहा कि उन्हें गर्व है कि सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब की जनता की सेवा के लिए उन पर भरोसा जताया है।

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इसलिए अहम है ज्वाइनिंग

जलालाबाद से बने थे विधायकः अक्तूबर 2019 में जलालाबाद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वह 16 अक्तूबर 2019 से 10 मार्च 2022 तक विधायक रहे।
गुरुहरसहाय में भी कांग्रेस को किया मजबूतः कौंसिल चुनावों के दौरान गुरुहरसहाय में कांग्रेस की राजनीतिक ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका रही।
फाजिल्का-जलालाबाद वैल्ट में प्रभावशाली चेहराः फाजिल्का-जलालाबाद बैल्ट में प्रभाव रखने वाले प्रमुख जट्ट सिख नेता।
राजनीतिक परिवार से संबंध: रमिंदर सिंह आवला के पिता डॉ. हरभजन सिंह आवला गुरुहरसहाय में लंबे समय तक कौंसिल के प्रधान रहे। रमिंदर सिंह खुद भी यूथ कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
जलालावाद में पकड़ः जलालाबाद क्षेत्र में आवला ने 2019 के उपचुनाव में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था।
सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रभाव का दावा: बॉर्डर बैल्ट के 25 से 30 विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ है। ऐसे में उनके शिअद में शामिल होने को सीमावर्ती क्षेत्रों में पार्टी का आधार मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
निजी फंड से एक करोड़ रुपए देने को लेकर रहे चर्चा मेंः हाल ही में गुरुहरसहाय जय में विकास कार्यों के लिए निजी फंड से कौंसिल की प्रधान को एक करोड़ रुपए देने के कारण भी चर्चा में रहे थे।
251 बेटियों की शादी करवाने का कार्यक्रमः 251 बेटियों की शादी करवाने और उन्हें दान-दहेज देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें बागेश्वर धाम के स्वामी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी शामिल हुए थे।

पंजाब के लिए था, पंजाव के लिए ही रहूंगा : आवला

66 मैं पंजाब के लिए था, पंजाब के लिए हूं और पंजाब के लिए ही रहूंगा। शिअद एक क्षेत्रीय पार्टी है और सुखबीर बादल की सोच दूरअंदेशी है। वह सच्चे मन से पंजाब की सेवा करना चाहते हैं। वह पंजाब को न सिर्फ कर्जमुक्त करना चाहते हैं बल्कि नशा, अपराध और बेरोजगारी को दूर करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। पंजाब की बिगड़ी कानून व्यवस्था की वजह से उद्योगपति यहां व्यापार से डर रहे हैं। मैं किसी भी सीट से चुनाव लडने को तैयार हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले चुनाव में शिअद दल एक ताकतवर पार्टी के रूप में उभरेगी क्योंकि सिर्फ शिअद ही ऐसी पार्टी है जो पंजाब की हर चुनौती को जानती है। -रमिंदर सिंह आवला

जलालाबाद से सुखवीर का गहरा नाता

  • सुखबीर बादल वर्ष 2009 से 2017 तक जलालाबाद से लगातार 3 बार विधायक रहे।
  • इसी हलके से वो डिप्टी सी.एम. बने थे।
  • अकाली सरकार के दौरान जलालाबाद में फोरलेन सड़कें, सीवरेज, स्टेडियम, सरकारी कॉलेज और नहरी पानी के बड़े प्रोजैक्ट आए थे।

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News Editor

Parveen Kumar

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