समंदर के बेताज बादशाह बने चीन-रूस: दुनिया की 10 सबसे ताकतवर नौसेनाओं में पिछड़ा US, जानें किस नंबर पर पहुंचा भारत

punjabkesari.in Monday, Aug 24, 2026 - 12:01 PM (IST)

Washington: दुनिया की नौसैनिक ताकत को लेकर 2026 की Global Firepower रैंकिंग सामने आई है और इसमें जहाजों की संख्या के आधार पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चीन 841 नौसैनिक पोतों के साथ पहले और रूस 747 के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि अमेरिका 465 पोतों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत ने भी 343 पोतों के साथ चौथा स्थान हासिल किया है। हालांकि, सिर्फ जहाजों की संख्या को किसी नौसेना की वास्तविक युद्ध क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता।

 

अमेरिका की रैंकिंग धड़ाम
Global Firepower के 2026 आंकड़ों के मुताबिक, चीन के पास कुल 841 नौसैनिक पोत हैं। इस लिहाज से वह दुनिया में पहले स्थान पर है। रूस 747 पोतों के साथ दूसरे और अमेरिका 465 पोतों के साथ तीसरे नंबर पर है। यानी जहाजों की कुल संख्या में चीन के पास अमेरिका से 376 और रूस के पास अमेरिका से 282 अधिक पोत हैं। लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। Global Firepower खुद बताता है कि केवल जहाजों की संख्या से नौसैनिक शक्ति की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। इसी वजह से उसने कुल नौसैनिक टन भार (tonnage) की अलग रैंकिंग भी जारी की है। इस पैमाने पर तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है और अमेरिका 8.26 मिलियन टन से अधिक कुल टन भार के साथ पहले नंबर पर है। चीन करीब 3.19 मिलियन टन के साथ दूसरे और रूस करीब 1.43 मिलियन टन के साथ तीसरे स्थान पर है।

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लिस्ट में भारत का स्थान 
भारत 343 नौसैनिक पोतों के साथ चौथे स्थान पर है। उसके बाद इंडोनेशिया 338, उत्तर कोरिया 332 और थाईलैंड 304 पोतों के साथ क्रमशः पांचवें, छठे और सातवें स्थान पर हैं। इटली 285, स्वीडन 279 और श्रीलंका 275 पोतों के साथ टॉप-10 में शामिल हैं। भारत और अमेरिका के बीच जहाजों की संख्या का अंतर 122 पोतों का है। लेकिन आधुनिक युद्ध क्षमता के मामले में दोनों देशों के बेड़ों की संरचना काफी अलग है। Global Firepower के आंकड़ों में अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, 66 पनडुब्बियां और 83 डिस्ट्रॉयर हैं, जबकि भारत के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर, 18 पनडुब्बियां और 13 डिस्ट्रॉयर हैं।

 

बेशक चीन के पास जहाज ज्यादा, लेकिन ...
चीन की कुल फ्लीट संख्या अमेरिका से बहुत ज्यादा है, लेकिन अमेरिकी नौसेना के पास बड़े और अत्याधुनिक युद्धपोतों की संख्या काफी अधिक है। Global Firepower के अनुसार अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर और 83 डिस्ट्रॉयर हैं। चीन के पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर और 53 डिस्ट्रॉयर हैं।  पनडुब्बियों के मामले में भी अमेरिका 66 के साथ आगे है, जबकि चीन के पास 61 पनडुब्बियां हैं। दूसरी तरफ चीन के पास बड़ी संख्या में फ्रिगेट, कॉर्वेट और पेट्रोल वेसल हैं, जिससे उसकी कुल फ्लीट संख्या काफी बढ़ जाती है।  इसलिए Global Firepower ने भी टन भार को वास्तविक समुद्री शक्ति का बेहतर संकेतक बताया है। रूस के पास कुल 747 नौसैनिक पोत हैं और इस संख्या के लिहाज से वह अमेरिका से काफी आगे है। रूस के पास 66 पनडुब्बियां हैं, जो अमेरिका के बराबर हैं। हालांकि अमेरिका के पास 83 डिस्ट्रॉयर हैं, जबकि रूस के पास 13 डिस्ट्रॉयर बताए गए हैं। रूस की बड़ी संख्या उसके कॉर्वेट और दूसरे छोटे युद्धपोतों की वजह से भी बनती है।

 

टॉप-25 देशों की  रैंकिंग

  • जहाजों और पनडुब्बियों की कुल संख्या के आधार पर 2026 की सूची में देशों की स्थिति इस प्रकार है। 
  • दुनिया के 25 सबसे बड़े नौसैनिक बेड़ों की रैंकिंग में चीन 841 नौसैनिक पोतों के साथ पहले स्थान पर है।
  • रूस 747 पोतों के साथ दूसरे और अमेरिका 465 पोतों के साथ तीसरे स्थान पर है।
  • भारत 343 पोतों के साथ चौथे स्थान पर है।
  • इसके बाद इंडोनेशिया 338, उत्तर कोरिया 332, थाईलैंड 304, इटली 285, स्वीडन 279 और श्रीलंका 275 पोतों के साथ क्रमशः पांचवें से दसवें स्थान पर हैं।
  • रैंकिंग में म्यांमार 239 पोतों के साथ 11वें, दक्षिण कोरिया 215 के साथ 12वें, कोलंबिया 213 के साथ 13वें, तुर्किये 192 के साथ 14वें और ग्रीस 186 के साथ 15वें स्थान पर है।
  • स्पेन 175 पोतों के साथ 16वें, यूक्रेन 169 के साथ 17वें, फ्रांस 166 के साथ 18वें, फिनलैंड 165 के साथ 19वें और मेक्सिको 164 पोतों के साथ 20वें स्थान पर है।
  • जापान 158 नौसैनिक पोतों के साथ 21वें, नाइजीरिया 152 के साथ 22वें, मिस्र 149 के साथ 23वें, नीदरलैंड 140 के साथ 24वें और चिली 130 नौसैनिक पोतों के साथ 25वें स्थान पर है।
  • अफ्रीका के नाइजीरिया और मिस्र भी टॉप-25 में इस सूची में नाइजीरिया और मिस्र की एंट्री भी ध्यान खींचती है।
  • नाइजीरिया 152 पोतों के साथ 22वें और मिस्र 149 पोतों के साथ 23वें स्थान पर है। दोनों देशों की समुद्री स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • नाइजीरिया के लिए समुद्री सुरक्षा तेल और गैस ढांचे तथा Gulf of Guinea से जुड़ी है, जबकि मिस्र की नौसैनिक रणनीतिक अहमियत स्वेज नहर की वजह से काफी बढ़ जाती है।

 

 क्या अमेरिका सच में चीन-रूस से कमजोर हुआ?
नहीं  इस रैंकिंग को इस तरह समझना गलत होगा कि अमेरिका की नौसेना अब चीन और रूस से सैन्य रूप से कमजोर हो गई है। यह खास तौर पर कुल जहाजों और पनडुब्बियों की संख्या की रैंकिंग है। अगर कुल टन भार, एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियों जैसी क्षमताओं को देखा जाए तो अमेरिका की स्थिति बेहद मजबूत बनी रहती है। Global Firepower के 2026 टन भार आंकड़ों में अमेरिकी नौसेना दुनिया में पहले स्थान पर है। इस  रैंकिंग के मुताबिक चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक बेड़ा जरूर है, लेकिन जहाजों की संख्या अकेले यह तय नहीं करती कि युद्ध की स्थिति में कौन-सी नौसेना सबसे ताकतवर होगी। जहाजों का आकार, टन भार, हथियार, सेंसर, एयरक्राफ्ट कैरियर, पनडुब्बियां, लॉजिस्टिक्स और दुनिया भर में ऑपरेशन करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

 


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Content Writer

Tanuja