प्रेमानंद महाराज ने बताया सच: नहाते समय यूरिन आना सही या गलत?
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 09:37 AM (IST)
Urinating/Shower: नहाते समय पेशाब करने की आदत को लेकर अक्सर लोग इसे एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हाल ही में आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज ने इस बारे में बड़े ही विस्तार से जानकारीदी है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो प्रेमानंद महाराज जी का मानना है कि जैसे ही व्यक्ति स्नान करना शुरू करता है, उसका शरीर एक विशेष प्रकार की विश्राम अवस्था यानी रिलैक्सिंग मोड में चला जाता है। पानी का स्पर्श मन और चेतना को इस कदर शांत करता है कि शरीर का आंतरिक दबाव स्वतः ही रिलीज होने लगता है, जो कभी पेशाब के रूप में तो कभी मानसिक तनाव से मुक्ति के रूप में बाहर आता है। उनके अनुसार, यह केवल सफाई का कार्य नहीं बल्कि शरीर और मन के जुड़ाव की एक प्रक्रिया है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का क्या कहना?
हालांकि, जब हम विज्ञान और डॉक्टरों की राय पर गौर करते हैं, तो तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स, विशेषकर OB-GYN (Obstetrics/Gynecology) विशेषज्ञों का कहना है कि शॉवर में खड़े होकर पेशाब करना, खासकर महिलाओं के लिए, भविष्य में 'पेल्विक फ्लोर' की मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है। इसके पीछे का वैज्ञानिक तर्क यह है कि खड़े होकर पेशाब करना इंसानी शरीर की प्राकृतिक स्थिति नहीं है, जिससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। इसके अलावा, बहते पानी की आवाज और पेशाब के बीच दिमाग का एक मनोवैज्ञानिक संबंध (कंडीशनिंग) बन जाता है। बार-बार ऐसा करने से दिमाग को यह संकेत मिलता है कि पानी की आवाज सुनते ही ब्लैडर को खाली करना है, जिससे आगे चलकर यूरिन लीकेज या अचानक तेज इच्छा होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बैठकर पेशाब करना सबसे सही तरीका
स्वास्थ्य के साथ-साथ हाइजीन यानी स्वच्छता का पहलू भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। यदि बाथरूम साझा है, तो फर्श पर रहने वाले बैक्टीरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बेहतर यूरिनरी हेल्थ के लिए बैठकर पेशाब करना सबसे सही तरीका है। इसके साथ ही पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाने के लिए केगेल एक्सरसाइज करने और बार-बार यूरिन अर्जेंसी महसूस होने पर डॉक्टर से परामर्श लेने की बात कही गई है। संक्षेप में कहें तो, जो आदत अभी सुविधा लग रही है, वह लंबे समय में सेहत के लिए चुनौती बन सकती है।
