IAS-IPS बनने के बाद कहां मिलेगी पोस्टिंग? जानिए IAS-IPS का कैडर आखिर कैसे तय होता है
punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 05:19 PM (IST)
UPSC Result 2025: संघ लोक सेवा आयोग यानी Union Public Service Commission ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ है, जो आगे चलकर Indian Administrative Service, Indian Police Service और Indian Forest Service समेत कई केंद्रीय सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस बार राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने परीक्षा में टॉप किया है। वहीं राजेश्वरी को दूसरा स्थान मिला है और एकांश धूल तीसरे स्थान पर रहे हैं। रिजल्ट घोषित होते ही सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से चर्चा में आ गया—UPSC पास करने के बाद अधिकारियों का कैडर आखिर तय कैसे होता है? दरअसल, कैडर तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होता है कि चयनित अधिकारी अपने करियर के दौरान किस राज्य या संयुक्त कैडर में सेवाएं देंगे।
UPSC पास करने के बाद शुरू होती है कैडर आवंटन की प्रक्रिया
सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है कैडर आवंटन (Cadre Allocation)। इसी प्रक्रिया के जरिए तय किया जाता है कि चयनित अधिकारी किस राज्य या कैडर में नियुक्त होंगे।
कैडर तय करने में मुख्य रूप से तीन अहम बातें देखी जाती हैं:
- उम्मीदवार की ऑल इंडिया रैंक (AIR)
- उम्मीदवार द्वारा दी गई राज्यों की प्राथमिकता सूची
- संबंधित राज्यों में उपलब्ध रिक्त पदों की संख्या
इन तीनों के संतुलन के आधार पर केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेती है।
अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग मंत्रालय तय करता है कैडर
कैडर आवंटन का फैसला अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग मंत्रालय करता है।
- IAS अधिकारियों का कैडर तय करता है Department of Personnel and Training (DoPT)
- IPS अधिकारियों का कैडर तय करता है Ministry of Home Affairs
- IFS अधिकारियों का कैडर तय करता है Ministry of Environment, Forest and Climate Change
कैडर आवंटन के लिए देश को 4 समूहों में बांटा गया
पिछले कुछ वर्षों में कैडर प्रणाली में बदलाव किया गया है। पहले राज्यों को पांच जोन में बांटा जाता था, लेकिन अब चार समूहों (Groups) की व्यवस्था लागू है।
Group A
आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, AGMUT कैडर, बिहार, छत्तीसगढ़
Group B
गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश
Group C
महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु
Group D
तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
उम्मीदवार सबसे पहले इन समूहों को अपनी प्राथमिकता क्रम में चुनते हैं, इसके बाद प्रत्येक समूह के भीतर राज्यों की सूची देते हैं।
इनसाइडर-आउटसाइडर नियम भी होता है लागू
- कैडर आवंटन में एक अहम नियम इनसाइडर-आउटसाइडर फॉर्मूला है।
- किसी राज्य के कैडर में लगभग 33% पद उसी राज्य के उम्मीदवारों के लिए होते हैं
- बाकी 66% पद दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को दिए जाते हैं
यदि किसी उम्मीदवार को अपना ही राज्य मिल जाता है तो उसे इनसाइडर कहा जाता है, जबकि दूसरे राज्य मिलने पर वह आउटसाइडर कहलाता है।
संतुलन के लिए लागू होता है साइकिल सिस्टम
अधिकारियों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के लिए साइकिल सिस्टम अपनाया जाता है।
इसमें चयनित उम्मीदवारों को 25-25 के बैचों में बांटा जाता है, जैसे:
- रैंक 1-25
- रैंक 26-50
- रैंक 51-75
हर साइकिल में अलग-अलग राज्यों के कैडर आवंटित किए जाते हैं, ताकि टॉप रैंकर्स एक ही राज्य में केंद्रित न हो जाएं और देशभर में प्रशासनिक संतुलन बना रहे।
कैडर सूची जारी होने के बाद शुरू होती है ट्रेनिंग
जैसे ही कैडर आवंटन की अंतिम सूची जारी होती है, चयनित अधिकारी अपने-अपने कैडर में प्रशिक्षण और नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
