US में गूंजा ‘वसुधैव कुटुंबकम’; न्यूयॉर्क में मोहन भागवत बोले- ‘एकता भारत के DNA में, विविधता का सम्मान जरूरी’(Video)
punjabkesari.in Sunday, Aug 30, 2026 - 01:55 PM (IST)
New York: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के DNA में है और ''इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।'' अमेरिका में शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।
“We are one; differences are illusions which fade away, making way for new illusions.”
— News Arena India (@NewsArenaIndia) August 29, 2026
- RSS Chief Mohan Bhagwat in New York pic.twitter.com/LwacYyPShf
उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।'' उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके DNS में हैं।'' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।
“If any Hindu thinks there should be no Muslims in Bharat, he will not remain a Hindu.”
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- RSS Chief Mohan Bhagwat in New York pic.twitter.com/LSyFuynFvm
RSS प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।'' करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।'' 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए। अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्र और 250 संगठन भी इसमें शामिल हुए। भागवत ने विविधता को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ''हम एक-दूसरे के हैं''। उन्होंने समुदाय तथा दुनिया के प्रति अपना योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ''हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उसमें दूसरों का योगदान होता है। हम दुनिया से बहुत कुछ लेते हैं, इसलिए हमें भी दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए।
“If any Hindu thinks there should be no Muslims in Bharat, he will not remain a Hindu.”
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हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं।'' भागवत (75) ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से अपनी 'कर्मभूमि' यानी जिस देश में वे रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''हमारा कर्तव्य क्या है? हम अमेरिका में हैं। हम अमेरिका में रहते हैं। हम अमेरिका में कमाते हैं। इसलिए हम अमेरिका का हिस्सा हैं और हमें अमेरिका के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ व्यवहार करना चाहिए।'' उनकी इस बात पर उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, ''भारतीय प्रवासियों का अपनी कर्मभूमि के प्रति एक कर्तव्य है। उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहना चाहिए।
“Habits must radically change to fight material lure.
— News Arena India (@NewsArenaIndia) August 29, 2026
Societies should remain firm against lures and avoid despair.”
- RSS Chief Mohan Bhagwat in New York pic.twitter.com/vUI8xcNtTr
'' उन्होंने कहा, ''चूंकि भारत उनकी जन्मभूमि है, अगर उनके मन में कुछ करने की इच्छा है और वे अपनी कर्मभूमि के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने के बाद ऐसा कर सकते हैं, तो इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन यह अनिवार्य भी नहीं है। आपकी जन्मभूमि आपसे अपेक्षा करती है कि आप उन मूल्यों के अनुसार जीवन जिएं, जो उसने आपको दिए हैं। वह मूल्य है एकता।'' उन्होंने कहा, ''भारत आपसे अपेक्षा करता है कि आप उसी तरह जीवन जिएं, जिस तरह भारत ने आपको जीवन जीने की सोच दी है, क्योंकि यही मनुष्य के लिए संतुलित जीवन जीने का एक आदर्श तरीका है।''
