सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का बड़ा खुलासा: कसाब की ''मटन बिरयानी'' वाली कहानी मैंने खुद गढ़ी थी, बताई ये चौंकाने वाली वजह?
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 08:41 AM (IST)
नई दिल्ली: सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अजमल कसाब की 'मटन बिरयानी' वाली कहानीको लेकर एक बड़ा खुलासा किया। वकील उज्ज्वल निकम ने बताया कि जेल में अजमल कसाब द्वारा मटन बिरयानी मांगे जाने की जो कहानी काफी चर्चा में रही थी, उसे उन्होंने खुद गढ़ा था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि 26/11 मुंबई हमलों के इस दोषी के प्रति लोगों के मन में कोई सहानुभूति पैदा न हो। इस दावे के झूठा होने की बात कई साल पहले ही स्वीकार कर चुके निकम ने एक बार फिर इस विवादित किस्से का जिक्र किया।
एक शो में शामिल हुए निकम ने बताया कि कैसे कसाब के मटन बिरयानी मांगने वाला उनका बयान 'ब्रेकिंग न्यूज़' बन गया और जेल में आरोपी के साथ किए जा रहे बर्ताव को लेकर बहस छिड़ गई। उन्होंने कहा, "जब पूछताछ खत्म हुई, तो मैंने कह दिया कि कसाब ने जेल में मटन बिरयानी मांगी है। यह ब्रेकिंग न्यूज़ बन गई। लोग पूछने लगे कि यह कैसा आतंकवादी है, जो इतने सारे बेगुनाह लोगों की जान लेने के बाद मटन बिरयानी मांग रहा है।"
निकम ने बताया कि अगले दिन कोर्ट में भी यह बात उठी, जब कसाब के वकील ने सवाल उठाया कि आरोपी अपने वकील से बिरयानी मांगने के बजाय सरकारी वकील से क्यों मांगेगा। निकम ने किस्सा सुनाते हुए कहा, "अगले दिन उसके वकील ने कोर्ट में बताया कि निकम सर ने दावा किया है कि कसाब ने मटन बिरयानी मांगी है। वकील ने पूछा, 'अगर कसाब को मटन बिरयानी चाहिए होती, तो वह मुझसे मांगता। वह आपसे क्यों मांगेगा?' तब जज ने मुझसे पूछा, 'क्या बात है?'"
निकम के मुताबिक, उन्होंने जवाब में कसाब की पृष्ठभूमि और खाने-पीने की पसंद का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मैंने कहा, 'सर, कसाब पाकिस्तान से आया है। उसका घर कराची के पास है और वह हमेशा से मांसाहारी खाना खाता रहा है। वह मटन बिरयानी खाता है। अब आप ही उससे पूछ लीजिए कि उसे मटन बिरयानी चाहिए या नहीं।'"
क्या कसाब ने मटन बिरयानी मांगी थी
हालांकि, निकम ने बताया कि जब जज ने कसाब से पूछा कि क्या उसने मटन बिरयानी मांगी थी, तो कसाब ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, "हो सकता है कि कसाब को सवाल समझ न आया हो, क्योंकि वह एक पंजाबी मुस्लिम था और उसे हिंदी बहुत अच्छी तरह समझ नहीं आती थी। जज ने उससे पूछा कि क्या उसने मटन बिरयानी मांगी थी, लेकिन कसाब ने कोई जवाब नहीं दिया। अब, सिर्फ कसाब और मैं ही जानते हैं कि उसने सच में मटन बिरयानी मांगी थी या नहीं।"
निकम ने 2015 में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कसाब ने न तो मटन बिरयानी की मांग की थी और न ही सरकार की ओर से उसे यह परोसी गई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह कहानी इसलिए गढ़ी थी ताकि मुकदमे के दौरान आरोपी के प्रति लोगों में बढ़ती सहानुभूति को रोका जा सके।
सरकार ने कसाब को कभी बिरयानी नहीं दी...
जयपुर में आतंकवाद विरोधी एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान निकम ने कहा, "कसाब ने कभी बिरयानी नहीं मांगी और न ही सरकार ने उसे कभी बिरयानी दी। मैंने यह कहानी सिर्फ उस भावनात्मक माहौल को तोड़ने के लिए बनाई थी, जो मुकदमे के दौरान कसाब के पक्ष में बन रहा था।" इस दावे के पीछे की वजह बताते हुए, निकम ने अदालत की एक घटना का जिक्र किया, जब कसाब अपनी आंखें पोंछता हुआ दिखा था। उन्होंने बताया कि मीडिया आरोपी की बॉडी लैंग्वेज पर बारीकी से नजर रख रहा था और उसने तुरंत इस पल को रिपोर्ट कर दिया।
निकम ने कहा, "मीडिया उसकी बॉडी लैंग्वेज को बहुत ध्यान से देख रहा था और कसाब को भी इस बात का पता था। एक दिन, कोर्ट रूम में उसने अपना सिर झुकाया और अपनी आंखें पोंछीं। कुछ ही पल बाद, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने खबर चला दी - कसाब की आंखों में आंसू।" उन्होंने आगे बताया कि उस दिन रक्षाबंधन था, जिससे यह कयास लगाए जाने लगे कि कसाब अपनी बहन के बारे में सोच रहा होगा। निकम के अनुसार, कुछ लोग तो यह सवाल भी उठाने लगे थे कि क्या वह सच में एक आतंकवादी है।
निकम ने कहा कि उन्हें लगा कि इस भावनात्मक प्रतिक्रिया को रोकना जरूरी है, इसलिए उन्होंने कसाब द्वारा बिरयानी मांगे जाने वाला बयान देने का फैसला किया। इस बीच, राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी' 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में कसाब पर चले मुकदमे को फिर से दिखाती है। यह फिल्म 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
