सरकारी नीतियों का आधार श्री कृष्ण की शिक्षाएं हैं- उडुपी में बोले पीएम मोदी
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 02:32 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पीएम मोदी आज कर्नाटक के उडुपी के ऐतिहासिक श्री कृष्ण मठ में विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान की उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। पीएम ने मंदिर परिसर में बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पवित्र कनकना किंदी के लिए कनक कवच (सोने का आवरण) भी समर्पित किया।

1 लाख लोगों के साथ पाठ कर बनाया इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को सौभाग्य बताते हुए कहा कि इतने सारे गुरुओं की उपस्थिति उनके लिए एक विशेष अनुभव है। उन्होंने कहा, "आज जब एक लाख लोगों ने एक साथ गीता के श्लोक पढ़े तो मानों भारत के लोगों ने सहस्त्र वर्षों की दिव्यता का साक्षात दर्शन भी किया है।" पीएम मोदी ने अपनी पिछली द्वारकाधीश यात्रा और कुरुक्षेत्र में मौजूदगी का भी उल्लेख किया।
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Addressing the Laksha Kantha Gita Parayana programme at Sri Krishna Matha in Udupi. Deeply honoured for the opportunity to be in the presence of the revered sages.
— Narendra Modi (@narendramodi) November 28, 2025
https://t.co/4E53zyQF7B
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श्री कृष्ण की शिक्षाओं को बताया सरकारी नीतियों का आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाओं को वर्तमान सरकारी नीतियों का आधार बताया। पीएम मोदी ने कहा, 'सबका साथ-सबका विकास, सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय' जैसी नीतियों के पीछे भगवान श्री कृष्ण के श्लोकों की प्रेरणा है। भगवान कृष्ण गरीबों की सहायता का मंत्र देते हैं, जो आयुष्मान भारत और पीएम आवास जैसी योजनाओं का आधार बनता है। श्री कृष्ण हमें नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं। इसी ज्ञान की प्रेरणा से देश ने 'नारीशक्ति वंदन अधिनियम' जैसा ऐतिहासिक निर्णय लिया।
शांति के लिए अत्याचारियों का अंत ज़रूरी
पीएम मोदी ने कहा कि श्री कृष्ण हमें विश्व कल्याण की बात सिखाते हैं, जो वैक्सीन मैत्री, सोलर अलायंस और वसुधैव कुटुम्बकम की हमारी विदेश नीतियों का आधार बनती हैं। उन्होंने भगवदगीता के संदेश पर जोर देते हुए कहा- ‘श्री कृष्ण ने गीता का संदेश युद्ध की भूमि पर दिया था और भगवदगीता हमें सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है।’
पीएम ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा नीति का मूल भाव यही है कि हम वसुधैव कुटुम्बकम भी कहते हैं और हम 'धर्मो रक्षति रक्षितः' का मंत्र भी दोहराते हैं। उन्होंने लाल किले से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश और मिशन सुदर्शन चक्र की उद्घोषणा का भी जिक्र किया।
