जिंदगी और मौत के असल मायने सिखाती है फिल्म ‘The Sky Is Pink’

Wednesday, Oct 09, 2019 - 09:35 AM (IST)

नई दिल्ली। किसी भी इंसान को जो चीज सबसे ज्यादा डराती है वो है मौत, फिर चाहे वो खुद की हो या फिर किसी अपने की। ये डर इतना बड़ा होता है कि इसके बारे में कोई भी सोचना तक नहीं चाहता लेकिन इसी मुश्किल सब्जेक्ट पर बात करने आ रही है फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ (The Sky Is Pink)।

इस फिल्म से लंबे समय के बाद प्रियंका चोपड़ा जोनस (Priyanka Chopra Jonas) बॉलीवुड (Bollywood) में वापसी कर रही हैं। प्रियंका के साथ-साथ फरहान अख्तर, (Farhan Akhtar) जायरा वसीम (Zaira Wasim) और रोहित सराफ (Rohit Saraf) मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

फिल्म की कहानी असल जिंदगी से प्रेरित है। 11 अक्तूबर को रिलीज हो रही इस फिल्म को डायरेक्ट किया है ‘अमु’ और ‘मार्गरीटा विथ अ स्ट्रा’ जैसी फिल्में बना चुकीं शोनाली बोस (Shonali Bose) ने। फिल्म प्रोमोशन के लिए दिल्ली पहुंची प्रियंका, शोनाली और रोहित ने पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/ हिंद समाचार से बातचीत की। पेश हैं इसके प्रमुख अंश।

फिल्म का हर सीन है रियल: प्रियंका चोपड़ा जोनस
ये फिल्म अदिति (Aditi) और नरेंद्र (Narendra) की रियल लाइफ से प्रेरित है जिनकी फिलॉसिफी मुझे बहुत ही अच्छी लगी। इस फिल्म का हर सीन रियल है, जो हमने अदिति और नरेंद्र से सुना है। ये फिल्म हमारी जिंदगी के लिए एक बहुत ही बड़ा मैसेज देती है। हर कोई अपने अलग-अलग रास्ते पर जा रहा है। इन रास्तों पर चलते हुए अक्सर हम भूल जाते हैं कि फैमिली का सपोर्ट कितना जरूरी होता है। ये फिल्म यही दिखाती है कि जब फैमिली एक साथ आती है, तब आप किसी भी बुलंदी पर पहुंच सकते हैं।

फिल्म से सीखा पापा की लाइफ को सेलिब्रेट करना
इस फिल्म में काम करके मैंने बहुत कुछ सीखा है। कह सकती हूं कि इस फिल्म ने मुझे हील किया है। पापा के देहांत के बाद मैं बहुत गुस्से में थी, मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करुं। शायद उस वक्त मैं अपने उस जज्बात को सही तरीके से संभाल नहीं पाई थी लेकिन इस फिल्म को करके मैंने इन रिश्तों को और बेहतर तरीके से समझा है और शायद अब मैं अपने पापा की लाइफ को पहले से ज्यादा सेलिब्रेट करने लगी हूं।

फरहान से लगता था डर
फरहान के साथ मैंने एक एक्टर और एक डायरेक्टर दोनों तरह से काम किया है। मैंने उनके साथ ‘डॉन’ (Don) की थी, तब मैं इस इंडस्ट्री में नई थी, तब मैं उनसे बहुत डरती थी। उनसे ज्यादा बात भी नहीं कर पाती थी। फरहान एक बहुत ही बेहतरीन कलाकार हैं, उन्हें जो भी काम दे दो, हमेशा वो उम्दा निकलकर आते हैं उसमें।

मौत मेरे लिए मुश्किल नहीं: शोनाली बोस
जब भी फिल्म मेकिंग के लिए मैंने कोई सब्जेक्ट लिया, हमेशा मेरे दिमाग में एक ही ख्याल था कि जिन लोगों को कहानी के बारे में कुछ पता नहीं है, कोई दिलचस्पी नहीं है, उन्हें कहानी से जोड़ पाऊं। अक्सर मेरे चुने हुए सब्जेक्ट को मुश्किल माना जाता है लेकिन असल में ये मेरे लिए मुश्किल नहीं होते। इस फिल्म के सब्जेक्ट की बात करुं तो मौत मेरे लिए मुश्किल नहीं है और न ही किसी और के लिए होनी चाहिए। ये एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हम सोचना नहीं चाहते। भले ही ये फिल्म मौत से जुड़ी है लेकिन असल में ये जिंदगी के बारे में है।

बेटे ने मरने से पहले दी थी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख
इस फिल्म में मैं यही दिखाना चाहती थी कि जिंदगी में जिंदगी होना बहुत जरूरी होता है, जो मुझे मेरे बेटे ने अपने आखिरी वक्त में सिखाया था। सच्चाई को स्वीकार करना बहुत जरूरी होता है। जैसे मैंने किया और मैं आज भी अपने बेटे को महसूस कर सकती हूं और मुझे उससे बिल्कुल भी डर नहीं लगता बल्कि मैं उसकी मौजूदगी को सेलिब्रेट करती हूं।

इस फिल्म को करने की थी एक खास वजह: रोहित सराफ
मैं 10वीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी क्योंकि मुझे एक्टिंग करनी थी। इसमें मेरी फैमिली ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। ये फिल्म भी ऐसा ही कुछ बताती है कि आप जिंदगी में जो करना चाहते हो वो करो। किसी और को आपके रास्ते तय मत करने दो। ये एक सबसे बड़ा कारण था कि मैं यह फिल्म करना चाहता था।

Chandan

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