7 घटनाएं जब नेताओं की वजह से शर्मसार हुआ लोकतंत्र!

Saturday, Feb 18, 2017 - 02:39 PM (IST)

नई दिल्लीः देश की कई राज्याें की विधानसभा में लोकतंत्र काे शर्मसार करने वाली घटनाएं लगातार देखने काे मिल रही है, जहां सियासत की मजबूरियां माननीयों को अक्सर आपा खोने पर मजबूर कर देती हैं। तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत के लिए विशेष सत्र का आगाज भी कुछ इसी अंदाज में हुआ। लेकिन ये पहला मौका नहीं है, जब जनता के नुमाइंदे दो-दो हाथ करने पर आमादा हुए हैं। इससे पहले भी देश के बाकी राज्यों में एेसी घटनाएं देखने काे मिल चुकी है।

अाईए नजर डालते हैं विधानसभा में हुई एेसी ही 7 घटनाअाें पर:-

1) 8 फरवरी 2017: पश्चिम बंगाल विधानसभा में हिंसा का ताजा मामला इसी महीने सामने आया, जब कांग्रेस और वाम मोर्चा के विधायक नारेबाजी के दौरान मार्शलों से भिड़ गए। सदन के भीतर तख्तियां और पोस्टर लेकर प्रदर्शन करने पर विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान को 2 दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। जब मन्नान ने विरोध किया तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों की मदद से बाहर निकाला गया। इस दौरान मार्शलों के साथ उनकी जमकर हाथापाई हुई और बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।

2) 5 अक्टूबर 2015: जम्मू-कश्मीर विधानसभा गोमांस के मसले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ और बात इतनी आगे बढ़ गई कि निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद और बीजेपी विधायकों के बीच हाथापाई हो गई।

3) 13 मार्च 2015: केरल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि ने मार्शलों के घेरे में बजट पेश किया। मणि पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विपक्षी बीजेपी और एलडीएफ ने उन्हें बजट ना पेश करने देने का ऐलान किया था। जैसे ही मणि ने बजट पढ़ना शुरू किया, विपक्षी सदस्यों ने धक्कामुक्की शुरू कर दी। हंगामे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष एन. शकतान की कुर्सी और कंप्यूटर तोड़ दिए गए। इस दाैरान हाथापाई में 2 विधायकों को चोटें भी आईं।

4) 10 नवंबर 2009: महाराष्ट्र विधानसभा में शपथ ग्रहण के लिए विधायकों की बैठक  बुलाई गई थी। समाजवादी पार्टी के एमएलए अबु आजमी का हिंदी में शपथ लेना एमएनएस के चार विधायकों को इतना नागवार गुजरा कि वो हिंसा पर उतारू हो गए। इसके उपरांत चारों विधायकों को 4 साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

5) 22 अक्टूबर 1997: इस दिन यूपी विधानसभा अखाड़े में तब्दील हो गई थी। मौका कल्याण सिंह के विश्वास मत का था। लेकिन बहस के बजाए विधायकों ने एक दूसरे पर जूते और माइक फेंकने शुरु कर दिए, जिससे कई विधायकों को भी चोटें आईं।

6) 25 मार्च 1989: तमिलनाडु विधानसभा में एक बार फिर दंगे जैसी स्थिति पैदा हो गई। बजट पेश होने के दौरान डीएमके और एडीएमके सदस्यों के बीच झगड़ा हुआ और बात जल्द ही हाथापाई तक पहुंच गई। हंगामे के दौरान दुर्गा मुरुगन ने जयललिता के कपड़े फाड़ने की कोशिश की, जबकि करुणानिधि का चश्मा टूट गया। इससे गुस्साए विधायकों ने बजट की कॉपी तक फाड़ दी।

7) जनवरी 1988: आज तमिलनाडु विधानसभा में करीब 3 दशक पुराना इतिहास दोहराया गया। जनवरी 1988 में जानकी रामचंद्रन ने भी इसी तरह विश्वास मत के लिए सत्र बुलाया था। वो पति एमजीआर के निधन के बाद सीएम बनी थीं। लेकिन पार्टी के ज्यादातर एमएलए जयललिता के साथ थे। 60 विधायकों वाली कांग्रेस में हाईकमान से जानकी के समर्थन का फरमान आया। कुछ विधायकों ने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया, जिससे जानकी सरकार बच सके। इसी सियासी खींचतान के बीच जब विधानसभा की बैठक हुई तो जमकर माइक और जूते चले और आखिरकार पुलिस को सदन के भीतर आकर लाठीचार्ज करना पड़ा था। बाद में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने जानकी सरकार को बर्खास्त कर दिया था।
 

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