शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा- अगर तुम इतनी भोली होती तो...
punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 10:16 AM (IST)

नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शादी का झूठा वादा कर बलात्कार के मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि रोमांटिक रिश्तों और कपल के ब्रेकअप के मामलों में महिलाओं को बलात्कार के आरोप नहीं लगाने चाहिए। उन्होंने इसे एक रूढ़िवादी मानसिकता का परिणाम बताया। इस मानसिकता में पुरुष को दोषी ठहराया जाता है और हमारे सिस्टम में खामियां हैं।
कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक व्यक्ति ने महिला द्वारा लगाए गए बलात्कार के आरोपों को खारिज करने की मांग की थी। महिला का आरोप था कि उस व्यक्ति ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि महिला इतनी भोली होती, तो वह कोर्ट तक नहीं आती। महिला बालिग थी और यह संभव नहीं है कि उसे यकीन दिलाया गया हो कि शादी हो जाएगी। आजकल युवाओं के बीच नैतिकता और सद्गुणों की धारणा बदल चुकी है। अगर अदालत महिला की बात से सहमत होती, तो इसका मतलब होता कि कॉलेजों में लड़के और लड़की के बीच हर रिश्ता अपराध बन जाएगा। उदाहरण के तौर पर अगर लड़का लड़की से कहे कि वह अगले हफ्ते शादी करेगा और फिर मना कर दे, तो क्या इसे अपराध माना जाएगा?
जस्टिस सुंदरेश ने यह भी कहा कि विवाह के अधिकारों को लेकर जो कानून हैं, उन्हें भी फिर से परखने की जरूरत है, क्योंकि इन नियमों के तहत महिला को पति के साथ रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जो सही नहीं हो सकता।
वहीं पीड़िता की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा कि यह मामला प्रेम संबंधों का नहीं, बल्कि एक तय शादी का है। इसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कल को कोई महिला अपने पति के खिलाफ वैवाहिक बलात्कार का आरोप लगा सकती है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि महिला ने खुद वरिष्ठ वकील की मदद ली, जो यह साबित करता है कि वह भोली-भाली नहीं हो सकती।