अस्थियां भी आप ही बहा देना... पिता के अंतिम विदाई में भी नहीं आईं बेटियां, Video call पर निपटाया सारा काम

punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 08:31 AM (IST)

सोनीपत : हरियाणा के सोनीपत से एक बेहद दर्दनाक और रिश्तों की कड़वी सच्चाई उजागर करने वाला मामला सामने आया है। कभी महाराष्ट्र के बड़े कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण गुप्ता (रतन) की एक वृद्ध आश्रम में इलाज के दौरान मौत हो गई लेकिन दुविधा यह रही कि अंतिम समय में अपनी बेटियों का चेहरा देखने की आस लिए दुनिया से अलविदा कह चुके इस बुजुर्ग के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन तक में उनकी तीनों बेटियां शामिल नहीं हुईं।

मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र निवासी कपड़ा कारोबारी शिवचरण गुप्ता लगभग डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत स्थित एक वृद्ध आश्रम में रहने आए थे। उनका कोई बेटा नहीं था। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर सक्षम बनाया जिनमें से दो बेटियां शिक्षिका (टीचर) हैं। आश्रम में रहने के दौरान ही उनकी पत्नी मीना गुप्ता का पहले निधन हो गया था जिसके बाद शिवचरण अकेले पड़ गए थे।

सोनीपत वृद्ध आश्रम के संचालक आनंद ने बताया कि लगभग 20 दिन पहले जब शिवचरण गुप्ता की तबीयत बिगड़ने लगी तो इसकी जानकारी उनकी तीनों बेटियों अनीता, निशा और प्रिया को दी गई थी। आपको बता दें कि सबसे बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहकर अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। दूसरी बेटी निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं और तीसरी यानि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं।

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संचालक के बताया कि बीमारी के दौरान बेटियों के फोन आने लगभग बंद हो गए थे। जब देर रात शिवचरण का निधन हुआ तब भी आश्रम प्रबंधन ने शव को सुरक्षित रखवाने की पेशकश की ताकि बेटियां अंतिम दर्शन कर सकें। हालांकि तीनों बेटियों ने समय की कमी का हवाला देकर आने से असमर्थता जता दी।

 

 

ऑनलाइन भेजे पैसे, वीडियो कॉल पर कराया अंतिम संस्कार

बेटियों के न पहुंचने पर आश्रम के सेवादारों और स्थानीय लोगों ने ही अंतिम संस्कार की रस्म अदा की। वहीं बड़ी बेटी अनीता ने ऑनलाइन 5,100 की राशि भेजकर आश्रम प्रबंधन से पिता का अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया। तीनों बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पिता के अंतिम संस्कार को देखा और प्रबंधन से संस्कार का पूरा वीडियो भेजने को कहा।

पहले बेटियों ने अस्थियां संभालकर रखने को कहा था लेकिन बाद में समय न होने की बात कहते हुए आश्रम संचालक को ही गंगा में अस्थियां प्रवाहित करने की जिम्मेदारी सौंप दी। पूरी जिंदगी परिवार को समर्पित करने वाले पिता की इस तन्हा विदाई ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं और समाज में ढहते पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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