कुछ लोग नीट आंदोलन का अनुचित फायदा उठा रहे है, उन्हें पंढरपुर तीर्थाटन में भाग लेना चाहिए : फडणवीस
punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 12:18 AM (IST)
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि कुछ लोग हिंसा में शामिल होकर नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन का गलत फायदा उठा रहे हैं, ऐसे लोगों को अपनी सोच की 'गंदगी' को दूर करने के लिए सालाना पंढरपुर यात्रा में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह संविधान के दायरे में रहकर होना चाहिए। उनका यह बयान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आया है।
मुख्यमंत्री भगवान विट्ठल को समर्पित पर्व आषाढ़ी एकादशी की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार की 'पर्यावरणाची वारी, पंढरीच्या दारी' (पंढरपुर तीर्थयात्रा) पहल के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कह रहे थे। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन ऐसा करते समय सभी को लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करना चाहिए।" भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता फडणवीस, नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा विद्यार्थियों के आंदोलन का समर्थन किए जाने से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। यह आंदोलन जून के अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। इसी मुद्दे पर ठाकरे बंधु (राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे) ने भी अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "आषाढ़ी एकादशी की पूर्व संध्या पर यहां पंढरपुर में मुझे जो आनंद और शांति का अनुभव हो रहा है, वैसा अनुभव उन्हें (प्रदर्शनकारियों की ओर इशारा करते हुए) भी कम-से-कम एक बार जरूर करना चाहिए।" उन्होंने कहा, "मैं सभी लोगों की बात नहीं कर रहा हूं, लेकिन कुछ लोग आंदोलन का गलत फायदा उठाकर हिंसा और ऐसी दूसरी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें भी एक बार वारी (तीर्थयात्रा) में शामिल होने का अवसर मिले। इससे उनके विचारों की नकारात्मकता दूर होगी।"
पंढरपुर वारी महाराष्ट्र की लगभग 800 वर्ष पुरानी वार्षिक तीर्थयात्रा है। इसमें वारकरी कहलाने वाले श्रद्धालु आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर सोलापुर जिले के पंढरपुर स्थित भगवान विट्ठल मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं। इस यात्रा में संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर जैसे पूज्य संतों की पादुकाओं (खड़ाऊं) को पालकियों में रखकर श्रद्धापूर्वक ले जाया जाता है। आंदोलन के प्रति केंद्र की भाजपा नीत सरकार के रवैये को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाये जा रहे आरोपों के सिलसिले में मुख्यमंत्री ने कहा, ''आज (शुक्रवार को दिल्ली में) बातचीत हुई है और कल (शनिवार को) भी बातचीत जारी रहेगी। किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए ही निकलता है।''
