तो क्या नवंबर 2026 को सचमुच खत्म हो जाएगी दुनिया? सोशल मीडिया पर 'कयामत' के दावे से मचा हड़कंप, जानें क्या है वैज्ञानिक सच
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 05:40 AM (IST)
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: इन दिनों सोशल मीडिया पर दुनिया के अंत को लेकर एक बेहद डरावना दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर लोगों के बीच खौफ और बहस दोनों पैदा कर दी हैं। दावा किया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने सालों पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि 13 नवंबर 2026 को दुनिया का अंत हो जाएगा और इसके बाद कभी 2027 का साल नहीं आएगा। हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो इसकी सच्चाई कुछ और ही निकली।
1960 की एक रिसर्च से शुरू हुआ विवाद
इस डरावने दावे की जड़ें 1960 में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में छिपी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के वैज्ञानिक हेंज वॉन फोस्टर (Heinz von Foerster), पेट्रीसिया मोरा और लॉरेंस एमियट ने उस समय दुनिया की बढ़ती आबादी पर एक शोध किया था। उन्होंने लगभग 2000 साल के जनसंख्या आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद एक गणितीय मॉडल (Mathematical Model) तैयार किया था। इस मॉडल में कहा गया था कि यदि आबादी इसी तेज गति से बढ़ती रही, तो 13 नवंबर 2026 तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
प्रलय नहीं, संसाधनों की कमी की थी चेतावनी
स्त्रोतों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने कभी यह नहीं कहा था कि 2026 में धरती फट जाएगी या कोई प्रलय आएगा। उनके शोध में "अनंत जनसंख्या" (Infinite Population) का जिक्र एक प्रतीकात्मक चेतावनी के तौर पर किया गया था। उनका असल मतलब यह था कि यदि जनसंख्या वृद्धि अनियंत्रित रही, तो इंसानों पर संसाधनों का भारी दबाव पड़ेगा, जिससे भूख, भीड़ और पर्यावरण से जुड़ी मुश्किलें जीवन को नर्क जैसा बना सकती हैं।
अब क्या है वर्तमान स्थिति?
आज के दौर में हालात 1960 के दशक के अनुमानों से काफी अलग हैं। हालांकि दुनिया की आबादी 8 अरब को पार कर चुकी है, लेकिन राहत की बात यह है कि जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब पहले के मुकाबले धीमी पड़ रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के ताजा अनुमानों के अनुसार, दुनिया की आबादी 2080 के आसपास अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर पहुंचेगी और उसके बाद धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
सोशल मीडिया पर क्यों फैला भ्रम?
इंटरनेट पर पुरानी वैज्ञानिक रिपोर्ट्स को अक्सर आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी के साथ साझा किया जाता है, जिसके कारण यह पुरानी 'पॉपुलेशन थ्योरी' अब "दुनिया खत्म होने की भविष्यवाणी" के रूप में वायरल हो गई है। आधुनिक वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज की बढ़ती गर्मी के कारण धरती पर जीवन के लिए असली खतरा पैदा होने में अभी करीब 1 अरब साल का समय है। ऐसे में 2026 में दुनिया खत्म होने की बात केवल एक सोशल मीडिया मिथक है।
