हैरान करने वाली दास्तां: जिस तरह की थी मौत की भविष्यवाणी, फिर वैसा ही हुआ...
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 02:49 PM (IST)
नेशनल डेस्क: ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। 16 साल के किशोर माइकी रॉयनन को अपनी मौत का जैसे पहले ही अंदेशा हो गया था। वह अक्सर अपनी मां से कहता था कि उसे डर लगता है कि कोई उसे चाकू मार देगा। मां ने इसे बेटे की चिंता या डर समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन किसे पता था कि यह डर उसकी जिंदगी की सबसे कड़वी सच्चाई बन जाएगा।
मां से आखिरी बातचीत ने तोड़ दिया दिल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस दिन माइकी की हत्या हुई, वह एक हाउस पार्टी में जाने वाला था। घर से निकलने से पहले उसने फोन पर अपनी मां हेली से बात की और कहा, “लव यू मॉम।” यही उसके आखिरी शब्द साबित हुए। उस समय हेली बर्मिंघम में एक कार्यक्रम में शामिल होने गई हुई थीं और उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह अपने बेटे से आखिरी बार बात कर रही हैं।
30 मिस्ड कॉल्स ने दी बुरी खबर
जब हेली कार्यक्रम से बाहर निकलीं, तो उनके फोन पर 30 मिस्ड कॉल्स थीं। घबराई हुई मां जब मौके पर पहुंचीं, तो पुलिस की घेराबंदी और फॉरेंसिक टेंट देखकर उन्हें समझ आ गया कि कुछ बहुत बुरा हो चुका है। यहीं उन्हें पता चला कि उनके बेटे की जान जा चुकी है और उसकी कही बात सच साबित हो गई है।
हाउस पार्टी में हुआ विवाद बना मौत की वजह
यह दर्दनाक घटना 10 जून 2023 की है। जांच में सामने आया कि जिस घर में पार्टी हो रही थी, वहां माइकी की कुछ अन्य लड़कों से कहासुनी हो गई थी। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि माइकी पर चाकू से हमला कर दिया गया। हमला बेहद बेरहमी से किया गया और माइकी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
‘जोम्बी नाइफ’ से किया गया हमला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि माइकी पर हमला किसी सामान्य चाकू से नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक ‘जोम्बी नाइफ’ से किया गया था। यह चाकू आकार में बड़ा और बेहद जानलेवा होता है। हैरानी की बात यह है कि माइकी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वह किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं था।
नाबालिग आरोपी को उम्रकैद की सजा
माइकी की हत्या के आरोप में 16 साल के ही एक अन्य लड़के शेन कनिंघम को दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि, कानून के तहत वह एक निश्चित उम्र के बाद जेल से बाहर आ सकता है।
मां का दर्द- सजा के बाद भी अधूरा इंसाफ
अदालत के फैसले के बाद भी माइकी की मां का दर्द कम नहीं हुआ है। उनका कहना है कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन उसका हत्यारा कुछ साल बाद जेल से बाहर आकर अपनी जिंदगी दोबारा शुरू कर सकेगा। मां का सवाल है कि क्या यही इंसाफ है और क्या एक मां के नुकसान की भरपाई कभी हो सकती है। यह मामला न सिर्फ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कई बार बच्चों का डर सिर्फ वहम नहीं, बल्कि आने वाले खतरे की चेतावनी भी हो सकता है।
