ममता के सामने ‘शाह’ चुनौती, क्या लगा पाएंगी जीत की हैट्रिक?

2021-02-26T20:35:07.723

नेशनल डेस्कः पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने शुक्रवार को तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने बंगाल में 8 चरणों में चुनाव कराने का निर्णय लिया है। पहला चरण 27 मार्च, दूसरा 1 अप्रैल, तीसरा चरण 6 अप्रैल, चौथा चरण 10 अप्रैल, पांचवां चरण 17 अप्रैल, छठवां चरण 22 अप्रैल, सातवां चरण 26 अप्रैल, आठवां चरण 29 अप्रैल में चुनाव संपन्न होंगे। चुनाव के नतीजे 2 मई को आएंगे। इस बीच ममता ने 8 चरणों में चुनाव कराए जाने पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। ममता ने कहा कि जो भाजपा ने कहा वही चुनाव आयोग ने किया। ऐसे में सवाल है कि क्या ममता बंगाल में हैट्रिक लगा पाएंगी।

चुनाव से पहले भाजपा ने झौंकी ताकत
चुनाव से पहले ही भाजपा ने अपने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को पश्चिम बंगाल में भेज दिया है। कई मंत्री और उपमुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा स्थानीय स्तर के नेता लगातार जनता से संपर्क कर रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने परिवर्तन रैली का भी आयोजन किया है। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार बंगाल के दौरा कर रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के चुनाव प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय लगातार बंगाल में पिछले कुछ सालों से लगातार बंगाल में भाजपा का रथ आगे बढ़ा रहे हैं। यहीं नहीं, पिछले 1 महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 बार बंगाल का दौरा कर चुके हैं और कई परियाजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है, जिसमें हाल ही में मेट्रो का विस्तार, बजट में मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए सौगातें भी दी हैं।

ममता के सामने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आई है। कुछ साल पहले तक ममता बनर्जी के सामने लेफ्ट और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में थे। लेकिन भाजपा के बंगाल में एंट्री के साथ ममता के सामने अमित शाह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने एकतरफा मुकाबले में 294 सीटों में से 213 सीटों पर जीत दर्ज की थी और भाजपा को सिर्फ 1 सीट पर ही विजय मिली। 2016 विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल का सियासी घटनाक्रम लगातार बदलता गया।

2017 में सबसे पहले मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन की। मुकुल रॉय ममता के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक थे। मुकुल रॉय के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अर्जुन सिंह, सौमित्र खान भी पाला बदलकर टीएमसी से भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा ने दोनों नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट दिया और मोदी लहर में दोनों नेता लोकसभा पहुंचे। वहीं 2021 में भी टीएमसी नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी हैं। इसमें हाल ही में ताजा नाम दिनेश त्रिवेदी का जुड़ा है जिन्होंने राज्यसभा के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। त्रिवेदी भाजपा में जाने की इच्छा भी जता चुके हैं।

कितनी विधानसभा सीट पर है बढ़त
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटों पर जीत दर्ज की है। लिहाजा, सीटों के हिसाब से देखें तो अभी भाजपा की 125 विधानसभा सीटों पर बढ़त है।  जिन लोकसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, उनमें  विष्णुपर,  अलीपुरद्वार, आसनसोल, बलूरघाट, बनगांव,  बांकुरा,  बैरकपुर,  बर्दवान,  कूचबिहार, दार्जिलिंग,  हुगली,  जलपाईगुड़ी, झारग्राम, मालदा उत्तर, मेदिनीपुर, राजयगंज, पुरुलिया, रानाघाट हैं। विधानसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने 200 पार का नारा दिया है। इसके लिए पार्टी ने बूथ लेवल से लेकर विधानसभा सीट तक अपने राष्ट्रीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। अमित शाह ने खुद पार्टी का अध्यक्ष रहते हुए बंगाल जीतने की बात कही थी।

इन सीटों पर रही दूसरे नंबर की पार्टी
भारतीय जनता पार्टी आम चुनाव में करीब 20 सीटों पर दूसरे नंबर रही, जिनमें आरामबाग, बारासात, बर्धमान, बशीरघाट, बीरभूमि, बोलपुर, डॉयमंड हॉर्बर, घटल, हावड़ा, जादवपुर, जांगीपुर, जॉयनगर, कांठी, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर, मालदा, दक्षिण, मथुरापुर, श्रीरामपुर, तालमुक, उलुबेरिया सीटें हैं। इन सभी सीटों पर भाजपा ने टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी।

आखिर ममता में इतनी छटपटाहट क्यों?
ममता बनर्जी की छटपटाहट आने वाले चुनाव को लेकर है। पश्चिम बंगाल में 2021 में मार्च-अप्रैल के महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में ममता नहीं चाहती कि उनकी कुर्सी को कोई और छीनकर ले जाए। दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव में 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी ने 22 सीटों पर जीत मिली, जबकि भाजपा ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए 18 सीटों पर कब्जा कर लिया। देश की सबसे पुरानी पार्टी ‘कांग्रेस’ की यहां हालत इतनी खस्ता हो गई कि उसे वह 2 सीटें ही जीत पाई। यहां से ममता और मोदी के बीच टकराव बढ़ता गया और आज तक लगातार जारी है। इससे पहले 2014 के लोकसभा 42 सीटों में से 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी और भाजपा को केवल 2 सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा था।

रोहिंग्याओं को लेकर सियासत चरम पर
राज्य में भाजपा की बढ़ती ताकत को देखते हुए ममता बनर्जी लगातार केंद्र और भाजपा पर हमलावर हैं। उन्होंने इसे अस्मिता की लड़ाई मानते हुए 'बाहरी बनाम बंगाली' का नारा दिया है। ममता ने कहा कि बंगाल में कोई बाहरी आकर राज नहीं करेगा। दूसरी तरफ, भाजपा बंगाल के विभिन्न इलाकों में अवैध तरीके से बसे रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर ममता सरकार को घेरने में जुटी हुई है। भाजपा महासचिव ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगले साल जनवरी में पश्चिम बंगाल में सीएए कानून लागू हो सकता है। भाजपा लगातार दीदी पर आरोप लगाती रही है कि ममता ने अवैध तरीके से बंगाल में रोहिंग्याओं को बसा रखा है, जो उनका वोट बैंक है।

ममता का सियासी ग्राफ
बता दें कि ममता बनर्जी साल 2011 में पहली बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं। इससे पहले वह केंद्र में यूपीए की सरकार में रेल मंत्री थीं। पश्चिम बंगाल में 2011 में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें 294 विधानसभा सीटों में से 227 सीटों पर कब्जा किया और राज्य की सत्ता संभाली। इसके बाद पश्चिम बंगाल में दीदी की लोकप्रियता बढ़ती गई और 2016 के विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर 294 में से 213 सीटों पर जीत हासिल कर दूसरी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।
 


Content Writer

Yaspal

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