राजस्थान में 22, 23 और 26 जनवरी को बारिश का साया, 50 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 09:13 AM (IST)
नेशनल डेस्क: राजस्थान में कड़ाके की ठंड के बीच अब आसमानी आफत का साया मंडरा रहा है। इस बार 26 जनवरी का जश्न भीग सकता है। मौसम विभाग (IMD) की नई चेतावनी के अनुसार, प्रदेश में एक के बाद एक दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) सक्रिय होने जा रहे हैं। इसका सीधा असर न केवल तापमान पर पड़ेगा, बल्कि राज्य के 14 जिलों में तेज़ अंधड़ और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
तूफान जैसी रफ्तार और 'येलो अलर्ट'
इस मौसमी बदलाव का सबसे गंभीर पहलू हवाओं की गति है। मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, आने वाले दिनों में राजस्थान के कई हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी। विभाग ने इस स्थिति को देखते हुए संवेदनशील जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका अर्थ है कि लोगों को मेघगर्जन और वज्रपात के समय सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
तारीख दर तारीख: कब-कहां बदलेगा मिज़ाज?
आगामी 6 दिनों का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहने वाला है:-
22 जनवरी: बीकानेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर समेत सीमावर्ती इलाकों में धूलभरी हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी की शुरुआत होगी।
23 जनवरी: असर और बढ़ेगा। अलवर, सीकर और झुंझुनूं जैसे शेखावाटी और मेवात इलाकों में वज्रपात (बिजली गिरना) और तेज़ हवाओं का साया रहेगा।
24-25 जनवरी: इन दो दिनों में आसमान तो साफ हो जाएगा, लेकिन न्यूनतम तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिर जाएगा, जिससे रात की ठिठुरन और बढ़ेगी।
26 जनवरी: गणतंत्र दिवस पर एक और नया सिस्टम सक्रिय होगा, जिससे जयपुर, जोधपुर और बीकानेर संभाग में बारिश होने की संभावना है।
तापमान का गणित और कोहरे का कहर
मंगलवार को प्रदेश के 10 से ज्यादा जिले घने कोहरे की चादर में लिपटे रहे। वर्तमान में माउंट आबू (5°C) और पाली (4.6°C) सबसे ठंडे बने हुए हैं। राजधानी जयपुर में न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश के बाद जब आसमान साफ होगा, तो गलन वाली सर्दी (मावठ के बाद की ठंड) आम जनजीवन को और प्रभावित करेगी।
विभाग की सलाह
"22, 23 और 26 जनवरी को मेघगर्जन के समय पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। किसान भाई अपनी फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें क्योंकि 50KMPH की हवाएं खुले में रखी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।"
