क्या सच में बाजार में आ गए केमिकल वाले ''नकली अंडे''? जानें वायरल वीडियो का पूरा सच
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 12:33 PM (IST)
नेशनल डेस्क: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिखने वाले अंडे नकली हैं। इस सनसनीखेज दावे के बाद उपभोक्ताओं के बीच डर और भ्रम का माहौल है। वीडियो देखने के बाद लोग काफी कंफ्यूज हैं कि क्या सच में फैक्टरी में असली दिखने जैसे अंडे बनाए जा सकते हैं? लोगों की चिंता को दूर करने के लिए खाद्य सुरक्षा और पोल्ट्री इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स से इस दावे की पड़ताल की।
पोषक तत्वों का खजाना है अंडा
खाद्य विशेषज्ञों के मुताबिक, एक मनुष्य के लिए अंडा पौष्टिक आहार में से एक है। इमें प्रोटीन पाया जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन A, D, B12, और E पाया जाता है। इसमें मौजूद आयरन और फॉस्फोरस हड्डियों और इम्युनिटी को बेहतर बनाते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट या हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है, तो वह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से 'प्लास्टिक या केमिकल' के हूबहू असली जैसे अंडे बनाना और उन्हें बेचना व्यावहारिक और आर्थिक रूप से संभव नहीं है, क्योंकि कृत्रिम अंडा बनाने की लागत असली अंडे के उत्पादन से कहीं अधिक आएगी।
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🚨SHOCKING
— Amitabh Chaudhary (@MithilaWaaala) July 1, 2026
Artificial eggs being produced in factories in China … no you can’t eat natural eggs even , all thanks to China which is the global factory of duplicate and adulterated goods pic.twitter.com/mXKhzOL0qk
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वायरल वीडियो की हकीकत क्या है?
FSSAI द्वारा इस वायरल वीडियो की कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। अक्सर ऐसे वीडियो विदेशों की खिलौना फैक्ट्रियों (जहां जेल या कीचड़ वाले बच्चों के खिलौने बनते हैं) के होते हैं, जिन्हें गलत संदर्भ में भारतीय बाजारों से जोड़कर वायरल कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती।
ऐसे में क्या करें उपभोक्ता?
उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि अंडे हमेशा अपने विश्वसनीय दुकान वाले से ही खरीदें। इसके अलावा बिना किसी सबूत के वीडियो को ज्यादा शेयर न करें। यदि आपको किसी भी खाने वाली साम्रगी की क्वालिटी पर शक होता है तो बिना किसी पुष्टि के अफवाह न उड़ाते हुए Food Safety Department में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि निष्पक्ष जांच की जा सके।
