5वीं और 8वीं में खत्म हुआ ऑटो प्रमोशन, 45 दिन में फिर देना होगा एग्जाम, इस राज्य ने बदले नियम
punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 04:52 PM (IST)
नेशनल डेस्क: राजस्थान सरकार ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 5वीं और 8वीं में लागू ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब न्यूनतम अंक हासिल किए बिना किसी भी छात्र को अगली कक्षा में सीधे प्रमोट नहीं किया जाएगा। यह नया नियम राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (RBSE) की ओर से जारी अधिसूचना के तहत लागू किया गया है और शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा।
पहले क्या व्यवस्था थी?
अब तक राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में कक्षा 8 तक ऑटोमैटिक प्रमोशन सिस्टम लागू था। 5वीं और 8वीं में बोर्ड परीक्षाएं जरूर होती थीं, लेकिन फेल होने के बावजूद छात्रों को अगली कक्षा में भेज दिया जाता था।
इस व्यवस्था का नतीजा यह हुआ कि कमजोर छात्र बिना बुनियादी समझ के आगे की कक्षाओं में पहुंच जाते थे। पढ़ाई का स्तर गिरता गया,आगे चलकर फेल होने और स्कूल छोड़ने की समस्या बढ़ी।
अब क्या बदलेगा? जानिए नए नियम
राज्य सरकार के नए फैसले के तहत अब 5वीं और 8वीं में न्यूनतम पासिंग मार्क्स (लगभग 33%) लाना अनिवार्य होगा। फेल होने वाले छात्रों को तुरंत प्रमोशन नहीं मिलेगा। रिजल्ट घोषित होने के 45 दिनों के भीतर स्कूलों को री-एग्जाम / सप्लीमेंट्री परीक्षा करानी होगी। कमजोर छात्रों के लिए रेमेडियल क्लासेस और अतिरिक्त कोचिंग अनिवार्य होगी। यदि छात्र दोबारा परीक्षा में भी सफल नहीं होता, तो उसे उसी कक्षा में रोका जा सकता है। हालांकि, कक्षा 8 तक किसी भी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
राज्य सरकार का मानना है कि बिना परीक्षा में पास हुए प्रमोशन से बच्चों की लर्निंग क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता है।
इस फैसले के मुख्य उद्देश्य हैं
- छात्रों को पढ़ाई के प्रति ज्यादा जिम्मेदार बनाना
- शुरुआती कक्षाओं में ही कमजोर बच्चों की पहचान करना
- शिक्षा का स्तर सुधारना
- भविष्य में ड्रॉपआउट रेट को कम करना
सरकार का कहना है कि सिर्फ पास करना नहीं, बल्कि सही मायने में सीखना जरूरी है।
RTE संशोधन से जुड़ा फैसला
यह कदम Right to Education (RTE) Act में 2019 के संशोधन के अनुरूप है। संशोधन के बाद राज्यों को यह अधिकार मिला था कि वे चाहें तो नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म कर सकते हैं। कई राज्य पहले ही ऐसा कर चुके हैं और अब राजस्थान ने भी इसे लागू कर दिया है।
