आरआरयू ने जम्मू-कश्मीर पर विशेष लेक्चर सीरीज का किया आरम्भ

2020-12-03T20:15:56.133

जम्मू: भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय-आरआरयू में स्कूल ऑफ मिलिट्री स्टडीज, स्ट्रैटेजी एंड लॉजिस्टिक्स ने 'जम्मू-कश्मीर पर विशेष लेक्चर श्रृंखला' का आज आरम्भ किया। इस श्रृंखला के पहले लेक्चर के वक्ता, भारतीय सेना के पूर्व उप-प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल डॉ सुब्रत साहा थे। डॉ साहा हाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (हृस््रक्च) के सदस्य और स्कूल ऑफ मिलिट्री अफेयर्स, रणनीति और लॉजिस्टिक्स, आरआरयू के निदेशक हैं। उन्होंने 'जम्मू कश्मीर के प्राचीन काल से १९८७ तक के भूगोल इतिहास और राजनीति' विषय पर अपना व्याख्यान दिया।

 

व्याख्यान के दौरान, लेफ्टिनेंट जनरल डॉ सुब्रत साहा ने घाटी के इतिहास, भूगोल और राजनीति का व्यापक अवलोकन किया। डॉ साहा ने कहा कि हमें वर्तमान में कश्मीर की सुख-शांति और प्रगति के लिए कार्य करते हुए अपने पिछले अनुभवों से सीखना चाहिए। उन्होंने घाटी में सर्वांगीण विकास के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के महत्व की बात की।

 

जीओसी 15 कोर कमांडर के रूप में कश्मीर में सेवा करने के अपने समृद्ध अनुभव को साझा करते हुए डॉ साहा ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कि सियाचिन और साल्टोरो रिज के साथ साथ कश्मीर घाटी की स्थलाकृति पर भी चर्चा की। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग  भारतीय संसद में 22 फरवरी, 1994 को पारित संसदीय प्रस्ताव को जनरल साहा ने दृढ़ता से दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपने कब्जे के हिस्सों को हर हाल में खाली करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि पीओके को पुनः प्राप्त करने के लिए सैन्य विकल्प भारत के पास हमेशा उपलब्ध है।

 

अंत में जनरल साहा ने स्वर्गीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के 'कश्मीरियत, इन्सानियत और जम्हूरियत' के नारे को मार्गदर्शक बिंदु मानकर आगे बढ़ने का आह्वान दिया।  व्याख्यान में  देशभर से रक्षा और सामरिक अध्ययन के विद्वानों और छात्रों ने भाग लिया।

स्कूल ऑफ मिलिट्री अफेयर्स, स्ट्रैटेजी एंड लॉजिस्टिक्स, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में रक्षा और रणनीतिक अध्ययन में पाठ्यक्रम संचालित करता है। यह व्याख्यान-श्रृंखला, स्कूल द्वारा, आरआरयू को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित की गई विभिन्न पहलों में से एक है।

--------ङ्ग-------


Monika Jamwal

Recommended News