पर्यावरण क्षतिपूर्ति मामले में होटल संचालक को राहत, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को फिर सुनवाई के निर्देश
punjabkesari.in Wednesday, Aug 26, 2026 - 03:14 PM (IST)
नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहाड़ों की रानी मंसूरी स्थित होटल टूरिस्ट होम पर लगाए गए 978750 रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति के मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडर् को दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि होटल संचालक को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद ही नया आदेश पारित किया जाए। तब तक बोडर् होटल के खिलाफ कोई दंडात्मक कारर्वाई नहीं करेगा।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने होटल टूरिस्ट होम की ओर दायर याचिका पर 24 अगस्त को सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई। याचिकाकर्ता ने पीसीबी के 16 अक्टूबर 2025 के नोटिस को चुनौती देते हुए कहा गया कि पीसीबी की ओर से उस पर सुनवाई का मौका दिये बिना 9,78,750 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई है।
याचिकाकर्ता इस मामले में पहले एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली पहुंचा। एनजीटी ने 17 अप्रैल 2025 को पूर्व में जारी नोटिस को निरस्त करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोडर् को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन कर नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए। इसके बाद बोडर् ने 27 मई 2025 को नया नोटिस जारी किया और होटल के जवाब के बाद 16 अक्टूबर 2025 को विवादित आदेश पारित किया। होटल की ओर से खंडपीठ में दलील दी गई कि उसने 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन सुनवाई का अवसर दिए बिना ही आदेश पारित कर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है।
पीसीबी के अधिवक्ता ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि होटल की 20 जुलाई 2026 की अभ्यावेदन पर व्यक्तिगत सुनवाई के बाद निर्णय लिया जाएगा और तब तक कोई दंडात्मक कारर्वाई नहीं की जाएगी। इस आश्वासन के आधार पर खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए बोडर् को व्यक्तिगत सुनवाई के बाद नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए।
