स्मार्ट सिटी मिशन मोदी सरकार की कार्यशैली का उदाहरण, घोषणाएं बड़ी पर जवाबदेही शून्य: राहुल गांधी
punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 01:09 PM (IST)
नेशनल डेस्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बड़ी घोषणाएं करना और फिर बिना किसी जवाबदेही के बढ़चढ़कर इसका प्रचार करना मोदी सरकार की कार्यशैली है। राहुल ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन इसी शैली का एक उदाहरण है। उन्होंने लोकसभा में 19 मार्च को उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न और सरकार के उत्तर का हवाला देते हुए यह दावा भी किया कि स्मार्ट सिटी मिशन धोखे के अलावा कुछ भी नहीं है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, ''कोई शहर 'स्मार्ट' नहीं हो सकता, अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा - साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा नहीं दे पाता। आपको मोदी सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन तो याद ही होगा, जिसके तारीफों के पुल बांधते प्रधानमंत्री थकते नहीं थे।" उन्होंने कहा, "अब जब यह योजना अपने समापन की ओर है तो मैंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा। और जो सच सामने आया उसे धोखे के अलावा कुछ और कह ही नहीं सकते, इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना ही नहीं था।"

रायबरेली से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश को एक आधी-अधूरी योजना को पूरे बदलाव की कहानी बनाकर बेचा गया। उन्होंने कहा, "सवाल पूछे कि कैसे होते हैं स्मार्ट सिटी, सफलता किस आधार पर तय हुई, कितने शहर सच में बदले, लोगों के जीवन में क्या ठोस बदलाव आया? तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।" उन्होंने कहा, "सिर्फ बताया गया की करीब 48,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट "पूरे" बता दिए, लेकिन अगर सब पूरा है, तो आपके शहर में क्या बदला?"
राहुल गांधी ने दावा किया, "जमीनी हकीकत अलग कहानी कहती है- दूषित पानी और खुले सीवर से मौतें हो रही हैं,गिरते पुल और धंसती सड़कें इस विफलता को और उजागर कर रही हैं।" उन्होंने कहा, "यह योजना मोदी सरकार की असली कार्यशैली का उदाहरण है- घोषणाएं बड़ी, प्रचार उससे बड़ा, और जवाबदेही शून्य।" कांग्रेस नेता ने कहा, "आप अपने शहर को सूची में खोजिए और खुद तय कीजिए कि क्या यह वही "स्मार्ट सिटी" है जिसका सपना आपको बेचा गया था?"

राहुल गांधी के प्रश्नों के उत्तर में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा था, "स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) के तहत, केंद्र सरकार के 48,000 करोड़ रुपये के आवंटन में से, मिशन के तहत चयन किए गए 100 शहर 47,458 करोड़ रुपये (शहरों के लिए कुल केंद्रीय आवंटन का 99 प्रतिशत हिस्सा) की केंद्रीय वित्तीय सहायता का दावा कर चुके हैं। एक मार्च, 2026 तक, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, 46,326 करोड़ रुपये की राशि (अर्थात शहरों के लिए जारी कुल केंद्रीय वित्तीय सहायता का 98 प्रतिशत) का उपयोग किया जा चुका है।"
उनका कहना था कि एससीएम के तहत, मिशन की शुरुआत से 1,64,811 करोड़ रुपये की कुल 8,064 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनमें से 1,56,159 करोड़ रुपये की 7,784 परियोजनाएं (कुल परियोजनाओं का 97 प्रतिशत) पूरी की जा चुकी हैं और 8,652 करोड़ रुपये की 280 परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में हैं। मंत्री ने यह भी कहा था, "एससीएम का उद्देश्य पूरे शहर का विकास नहीं था, बल्कि रेट्रोफिटिंग, पुनर्विकास, ग्रीनफील्ड विकास और एक पैन-सिटी पहल के माध्यम से एक क्षेत्र-आधारित विकास दृष्टिकोण का पालन करना था, जिसमें शहर के बड़े हिस्से को कवर करते हुए स्मार्ट समाधान कार्यान्वित किए जाते हैं, ताकि एक प्रतिकृति योग्य मॉडल तैयार किया जा सके।"

उन्होंने कहा था, "नीति आयोग ने सितंबर 2025 में प्रकाशित 'शहरी परिवर्तन क्षेत्र और कौशल विकास में केंद्र प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन' शीर्षक की अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि एससीएम मिशन ने भारत की शहरी जरूरतों के लिए मजबूत प्रासंगिकता प्रदर्शित की है, इसके उद्देश्य राष्ट्रीय विकास एजेंडे और एसडीजी के अनुरूप हैं।" स्मार्ट सिटी मिशन भारत सरकार की ओर से 25 जून 2015 को शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य 100 शहरों को टिकाऊ, नागरिक-अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है।
