हरियाणा के जींद से देश की पहली ''हाइड्रोजन ट्रेन'' को हरी झंडी दिखाएंगे PM मोदी
punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 11:16 AM (IST)
नेशनल डेस्क: तकनीकी नवाचार और हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, PM मोदी 17 जुलाई, 2026 को देश की पहली 'हाइड्रोजन ट्रेन' की शुरुआत करेंगे। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर दौड़ने वाली यह अत्याधुनिक ट्रेन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगी। ग्लोबल लेवल पर बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच भारतीय रेलवे ने अपने आधुनिकीकरण को तेज कर दिया है। इस बदलाव की शुरुआत के लिए हरियाणा का चयन राज्य के मजबूत और विकसित बुनियादी ढांचे को दर्शाता है।
हरियाणा को मिलेगी ₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात
17 जुलाई का दिन न केवल भारतीय रेलवे बल्कि पूरे हरियाणा के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रदेश के चौतरफा विकास के लिए करीब 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिल्प-उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
- जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन सेवा और कुरुक्षेत्र में देश का पहला एलिवेटेड रेलवे ट्रैक।
- भिवानी और नारनौल में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत।
- दिल्ली-अम्बाला-कटरा एक्सप्रेसवे, अम्बाला-काला अम्ब नेशनल हाईवे, और जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग।
- कुरुक्षेत्र में ऐतिहासिक सिख संग्रहालय और हांसी-बरवाला हाईवे का शिलान्यास।
क्या है हाइड्रोजन तकनीक और क्यों है यह खास?
हाइड्रोजन ट्रेनें पूरी तरह से Fuel Cell तकनीक पर काम करती हैं। इसमें ट्रेन के अंदर मौजूद हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन के बीच एक chemical Process होता है, जिससे बिजली पैदा होती है। इस पूरे प्रोसेस में केवल पानी की भाप और गर्मी बाहर निकतली है। यह तकनीक उन रेलमार्गों के लिए एक गेंम चेंजर है, जहां पर पारंपरिक रुप से बिजली की तारें बिछाना मुश्किल है। इससे डीजल पर निर्भरता भी काफी कम होगी।
'विकसित भारत' के संकल्प को नई गति
हरियाणा सरकार ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए PM मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। हरियाणा सरकार का मानना है कि डबल इंजन के प्रयासों से हरियाणा आज देश में विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और हरित तकनीक का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। 17 जुलाई से शुरू हो रही यह यात्रा केवल यात्रियों को मंजिल तक नहीं पहुंचाएगी, बल्कि यह एक आत्मनिर्भर, आधुनिक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भारत के सुनहरे भविष्य की शुरुआत करेगी।
