PM मोदी ने बांग्लादेश को दिया बड़ा संदेश, बोले- प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा “यादगार” बनेगा
punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 03:31 PM (IST)
Dhaka: भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में जारी तनाव के बीच नई दिल्ली की ओर से संबंध सुधारने की कोशिश के संकेत मिले हैं। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा “यादगार” हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रहमान की प्रस्तावित यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट है कि दोनों नेताओं को मुलाकात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आने पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का उचित और सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि मोदी चाहते हैं कि रहमान की भारत यात्रा यादगार बने। उनके मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच मजबूत संवाद और संपर्क से अंततः भारत और बांग्लादेश के लोगों तथा दोनों देशों के कारोबारियों को फायदा होगा।
हसीना के प्रत्यर्पण से बढ़ा तनाव
दोनों देशों के बीच संबंधों में सबसे बड़ा विवाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर है। शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता से हट गई थीं और इसके बाद भारत आ गई थीं। बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान कथित मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। भारत का कहना है कि हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध की लागू कानूनों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है।
इस कारण भी बिगड़े थे रिश्ते
हाल में दोनों देशों के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया था जब 5 अगस्त को शेख हसीना ने नई दिल्ली से डिजिटल माध्यम के जरिए मीडिया से बातचीत की थी।बांग्लादेश ने इस कार्यक्रम पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि इससे उसके लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की कोशिशों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि हसीना के इस मीडिया कार्यक्रम में भारत की कोई भूमिका नहीं थी और कार्यक्रम में बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का भारत समर्थन नहीं करता।
‘अतीत को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें’
भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों से पुराने मतभेदों को सुलझाकर भविष्य की ओर देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अतीत को भुलाने की जरूरत नहीं है, लेकिन पुराने मतभेदों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुलझाकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक देशों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं और बातचीत तथा आपसी संपर्क के जरिए उन्हें दूर किया जा सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि टिकाऊ संबंधों की नींव आपसी और बिना शर्त विश्वास पर टिकी होती है। भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन व्यापक संबंधों पर मतभेदों का नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के साझा इतिहास और संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश सिर्फ सीमा ही साझा नहीं करते, बल्कि दोनों देशों के सपने, आकांक्षाएं और समानताएं भी साझा हैं।
