कर्तव्य भवन का उद्घाटन कर बोले PM मोदी- गुलामी की जंजीरें टूटीं, विकसित भारत की नई शुरुआत
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 07:22 PM (IST)
नेशनल डेस्क: 13 फरवरी 2026 को राजधानी नई दिल्ली ने प्रशासनिक इतिहास का एक अहम अध्याय दर्ज किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का उद्घाटन किया, जो अब प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय का नया एकीकृत मुख्यालय बनेगा।
इसके साथ ही ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का भी लोकार्पण किया गया, जहां वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, संस्कृति, विधि, सूचना-प्रसारण, रसायन-उर्वरक और जनजातीय कार्य समेत कई अहम मंत्रालयों को स्थानांतरित किया गया है।
95वें स्थापना दिवस पर बड़ा बदलाव
यह समारोह नई दिल्ली के 95वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ। लंबे समय तक ब्रिटिश कालीन प्रशासन का प्रतीक रहे South Block से प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण इस बदलाव का प्रमुख संकेत माना जा रहा है।
‘सेवा तीर्थ’ का पूर्व नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे 2 दिसंबर 2025 को बदलकर नया नाम दिया गया। दारा शिकोह रोड स्थित इस परिसर के नीचे ‘नागरिक देवो भवः’ का मंत्र अंकित है, जो नागरिक-केन्द्रित शासन के विचार को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें
उद्घाटन अवसर पर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश एक नए युग की शुरुआत का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि साउथ और North Block जैसे भवन औपनिवेशिक शासन के प्रतीक रहे हैं और अब भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
विजया एकादशी का संदर्भ
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि यह दिन विक्रम संवत 2082 की फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी है। मान्यता है कि इस दिन लिया गया संकल्प सफलता की ओर ले जाता है, और भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।
पुराने भवनों का नया स्वरूप
उन्होंने कहा कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों की स्मृतियां सहेजी जाएंगी। इन भवनों को राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है।
नाम परिवर्तन की श्रृंखला
राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, मुगल गार्डन का अमृत उद्यान और पुराने संसद भवन का संविधान भवन किए जाने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे नए भारत की पहचान बताया।
विकास की गति
उन्होंने कहा कि भारत सुधारों की तेज रफ्तार पर आगे बढ़ रहा है। नए व्यापार समझौते, प्रशासनिक एकीकरण और लक्ष्य-आधारित योजनाएं देश को नई दिशा दे रही हैं। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन इसी परिवर्तन का आधार बनेंगे।
आधुनिक और नागरिक-केंद्रित परिसर
यह नया प्रशासनिक केंद्र आधुनिक तकनीक, पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन और एकीकृत कार्यप्रणाली से लैस है। उद्देश्य है—निर्णय प्रक्रिया को तेज, समन्वित और प्रभावी बनाना।13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री ने इसे भारत की विकास यात्रा में नई शुरुआत का प्रतीक बताया और कहा कि देश ‘सेवा, सुशासन और कर्तव्य’ की भावना के साथ आगे बढ़ेगा।
