कांग्रेस का बड़ा दावा- PM के लिए हमेशा ''खाऊंगा, खाने दूंगा और खिलाऊंगा'' वाली स्थिति रही है
punjabkesari.in Monday, Jul 13, 2026 - 10:46 AM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि प्रधानमंत्री का "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" का नारा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है और उनके लिए हमेशा "खाऊंगा, खाने दूंगा और खिलाऊंगा" वाली स्थिति रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट कर यह भी कहा कि मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने "ना खाऊंगा ना खाने दूंगा " का नारा दिया था, लेकिन बाद की घटनाओं ने इस दावे की वास्तविकता उजागर कर दी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नोटबंदी पर की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे "संगठित लूट और वैध ठहराई गई लूट" बताया गया था।
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मई 2014 में नरेंद्र मोदी "ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा" का नारा देकर प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन यह दावा जल्द ही खोखला साबित हो गया, जब डॉ. मनमोहन सिंह ने 8 नवंबर, 2016 की नोटबंदी को "संगठित लूट और कानूनी डकैती" करार दिया। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 13, 2026
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रमेश ने आरोप लगाया कि गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) को ओएनजीसी में विलय कर 20,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने चुनावी बॉन्ड योजना को "चंदा दो, धंधा लो" घोटाला बताते हुए कहा कि इससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। रमेश ने अदाणी समूह के मुद्दे, राफेल सौदे, 'पीएम केयर्स फंड' तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि हाल के सप्ताहों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे के दुरुपयोग का मामला सामने आया है, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद वह पद पर बने हुए हैं और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पर रिश्तेदारों को कथित लाभ पहुंचाने के आरोपों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि विपक्षी दलों को वित्तीय प्रलोभन देकर तोड़ा जा रहा है, केंद्र सरकार में एक राज्य मंत्री अपनी ही मंत्रालय की योजना के तहत सब्सिडी लेने के बावजूद पद पर बने हुए हैं । उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय में चार करीबी सहयोगियों को अचानक हटाए जाने से सवाल खड़े हुए हैं, ई-20 पेट्रोल से जुड़े फैसलों से एक केंद्रीय मंत्री के परिवार को लाभ पहुंचाने का प्रयास हो रहा है तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य शासन-प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में परीक्षा प्रणाली भ्रष्ट और समझौतापरक बन गई है, जिससे करोड़ों युवाओं की उम्मीदों को आघात पहुंचा है। कांग्रेस नेता ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और सरकार से जवाब देने की मांग की। रमेश ने दावा किया, "प्रधानमंत्री मोदी ने "न्यूनतम शासन, अधिकतम पर्दा डालने" की व्यवस्था दी है। उनके लिए हमेशा से यही रहा है-"खाऊंगा, खाने दूंगा और खिलाऊंगा।"
