SCO बैठक में ईरान ने PM मोदी से मांगी मदद, कहा- ''भारत ही करा सकता इस युद्ध का अंत''
punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 07:13 PM (IST)
Bishkek: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। इस बैठक में भारत-ईरान संबंधों, क्षेत्रीय शांति और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ईरानी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी से अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और भारत के प्रभाव का इस्तेमाल कर युद्ध और रक्तपात को समाप्त करने में मदद करने की अपील की। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत को क्षेत्र और दुनिया में एक महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि नई दिल्ली विभिन्न देशों के साथ अपने व्यापक संबंधों का उपयोग कर संघर्षरत पक्षों को युद्ध के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते की ओर वापस ला सकती है।
ईरान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, किर्गिस्तान में आयोजित SCO राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन और शंघाई प्लस बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हालिया संघर्ष के दौरान ईरान को भारत द्वारा दिए गए समर्थन और सहयोग की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया। मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के बीच भविष्य में व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत के लिए ईरान के महत्व को रेखांकित किया और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत बनाने की इच्छा जताई।
क्षेत्रीय हालात पर अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि उनकी सरकार की शुरुआत से ही कोशिश शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने की रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कूटनीतिक रास्तों को अपनाने के बजाय अमेरिका ने युद्ध, असुरक्षा और दबाव की नीति को चुना। पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान की प्राथमिकता हमेशा संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करना रही है और देश ने कभी युद्ध का स्वागत नहीं किया।ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान अपने समझौतों के तहत की गई प्रतिबद्धताओं पर कायम रहा है, लेकिन उनके अनुसार अमेरिकी पक्ष अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ईरान बातचीत और आपसी समझौते की दिशा में प्रयास जारी रखना चाहता है। पेजेश्कियान के अनुसार, युद्ध का लगातार जारी रहना न सिर्फ ईरान के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और मानवता के हित में भी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की जिम्मेदारी अपने नागरिकों को खतरे और असुरक्षा से बचाना तथा उनके लिए शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
ईरानी राष्ट्रपति की यह अपील ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक मंचों पर लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की बात करता रहा है।भारत के कई प्रमुख देशों के साथ मजबूत संबंध हैं और वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संवाद बनाए रखने की क्षमता रखता है। ऐसे में ईरान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी से की गई यह अपील भारत की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत को भी दर्शाती है। हालांकि किसी युद्ध या संघर्ष को समाप्त करने के लिए केवल एक देश की कोशिश पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए संघर्ष में शामिल सभी पक्षों की राजनीतिक इच्छा, बातचीत और समझौते की तैयारी भी जरूरी होती है।
