पेट्रोल-डीजल, LPG गैस... जंग रूकने के बाद केंद्र सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 07:28 PM (IST)
नेशनल डेस्क : वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर मजबूत तैयारी का संकेत दिया है। केंद्र सरकार के कोयला, पेट्रोलियम और विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया है कि देश में कोयला, पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है, और आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाए गए हैं।
बिजली संकट टालने के लिए मजबूत बैकअप
कोयला मंत्रालय के अनुसार, देश में बिजली उत्पादन की लगभग 70 प्रतिशत जरूरत अब भी कोयले पर आधारित है। मंत्रालय के अधिकारी संजीव कुमार कस्सी ने बताया कि संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से ही पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में देश के पास करीब 55 मिलियन टन कोयले का स्टॉक मौजूद है, जो अगले 24 दिनों तक निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। कोल इंडिया को राज्यों की जरूरत के अनुसार कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, उद्योगों पर नियंत्रण
पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मंत्रालय की अधिकारी सुजाता शर्मा के मुताबिक, फार्मा, कृषि, स्टील और टेक्सटाइल समेत 16 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को अब उनके पूर्व औसत उपभोग का केवल 70 प्रतिशत कमर्शियल LPG ही दिया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य घरेलू गैस की उपलब्धता को स्थिर बनाए रखना है। इसके साथ ही, कालाबाजारी पर भी सख्ती की गई है। हाल के दिनों में देशभर में हजारों छापेमारी की गई, जिसमें 56,000 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त किए गए और 51 डिस्ट्रीब्यूटर्स को निलंबित किया गया है।
विदेश नीति पर स्पष्ट रुख, अफवाहों का खंडन
विदेश मंत्रालय ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के बदले ईरान को कोई शुल्क देने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से वैश्विक व्यापार की स्वतंत्रता और निर्बाध नौवहन का समर्थक रहा है।
पश्चिम एशिया में शांति की अपील
भारत ने पश्चिम एशिया में घोषित युद्धविराम का स्वागत करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि यह संघर्ष न केवल मानवीय संकट को जन्म दे रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर रहा है।
