तेज प्रताप यादव के खाली किए बंगले पर बवाल! नए मंत्री ने कहा – रहने लायक नहीं, सब कुछ उखाड़ ले गए
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 09:58 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पटना के 26एम स्टैंड रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव द्वारा खाली किए गए इस बंगले को अब बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान को आवंटित किया गया है। लेकिन बंगले का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने इसकी बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निरीक्षण में सामने आई बंगले की खराब हालत
शनिवार को जब मंत्री लखेंद्र पासवान बंगले का जायजा लेने पहुंचे, तो हालात देखकर हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि बंगले की छत से पानी टपक रहा है, रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं बची है और पंखे व एसी पूरी तरह हटाए जा चुके हैं। बिजली की फिटिंग्स, कुर्सियां और यहां तक कि गेट तक या तो टूटे हुए हैं या गायब हैं।
मंत्री का आरोप – रहने की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं
लखेंद्र पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार किसी मंत्री को रहने के लिए अयोग्य आवास नहीं देती, लेकिन उन्हें जो बंगला सौंपा गया है, वह पूरी तरह खाली और जर्जर हालत में है। उन्होंने बताया कि अंदर जाकर देखने पर साफ हो जाता है कि वहां रहने की कोई व्यवस्था नहीं छोड़ी गई है। मौजूदा स्थिति में इस बंगले में रहना संभव नहीं है।
भवन निर्माण विभाग को मौके पर बुलाया गया
मंत्री ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया और बंगले की पूरी स्थिति दिखाई। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक हर मंत्री और विधायक को बुनियादी सुविधाओं से लैस सरकारी आवास मिलना चाहिए, लेकिन यहां उन मानकों का पूरी तरह उल्लंघन हुआ है।
विभाग ने दिए जांच और मरम्मत के संकेत
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब बंगले का औपचारिक निरीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा। भवन निर्माण विभाग ने भरोसा दिलाया है कि आवश्यक मरम्मत कार्य और सुविधाओं की बहाली जल्द शुरू की जाएगी, ताकि मंत्री को रहने योग्य आवास उपलब्ध कराया जा सके। तेज प्रताप यादव के बंगला खाली करने के बाद सरकार ने मंत्रियों के आवास आवंटन की प्रक्रिया पूरी की थी।
सरकारी आवास व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पटना में सरकारी आवासों की स्थिति और उनके हस्तांतरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी किस पर तय होती है और बंगले को रहने योग्य बनाने में कितना वक्त लगता है।
