Papmochani Ekadashi Vrat: पापों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत कल, भूलकर भी न करें ये गलतियां

punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 05:55 PM (IST)

नेशनल डेस्क: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान Vishnu की आराधना के लिए समर्पित होता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष में दो एकादशी आती हैं, जिनका धार्मिक महत्व अलग-अलग होता है। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च (रविवार) को रखा जाएगा।

पापमोचनी एकादशी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार इस बार एकादशी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा—

  • एकादशी तिथि आरंभ: 14 मार्च 2026 सुबह 8:10 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026 सुबह 9:16 बजे
  • सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहने के कारण व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा।

पापमोचनी एकादशी के शुभ मुहूर्त

पूजा और व्रत के लिए कुछ खास समय अत्यंत शुभ माने जाते हैं—

  • सूर्योदय: लगभग सुबह 6:40 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 से 5:43 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 6:30 से 7:00 बजे

धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से करने का विधान है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर जल, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। पापमोचनी एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। व्रत रखने वाले भक्त दिन भर फलाहार जैसे फल, दूध या मखाने का सेवन कर सकते हैं और अनाज व नमक से परहेज रखते हैं।

व्रत पारण का समय

पापमोचनी एकादशी का व्रत अगले दिन यानी 16 मार्च 2026 (सोमवार) को खोला जाएगा।

  • पारण समय: सुबह 6:30 बजे से 8:54 बजे तक
  • द्वादशी तिथि समाप्त: सुबह 9:40 बजे
  • इस समय के भीतर भोजन ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है।

धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत मनुष्य को पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और आध्यात्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। चूंकि यह एकादशी चैत्र नवरात्रि से पहले आती है, इसलिए इसे आध्यात्मिक तैयारी और मन की शुद्धि के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

SHUKDEV PRASAD

Related News