पाकिस्तान का नया ‘डिजिटल जिहाद’ अभियान, भारत को निशाना बना रहे 5,000 से अधिक फर्जी अकाउंट

punjabkesari.in Wednesday, Oct 14, 2026 - 01:42 PM (IST)

नई दिल्ली। भारत में चल रहे एसआईआर (SIR) यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने भारत के खिलाफ अपना 'डिजिटल जिहाद' अभियान काफी तेज कर दिया है। खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तान में 5,000 से ज्यादा ऐसे फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए हैं, जिनका मुख्य मकसद भारत सरकार और सुरक्षा बलों की छवि को धूमिल करना और देश में झूठी खबरें फैलाना है।

हिंसा भड़काने की साजिश
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों का कहना है कि इन फर्जी अकाउंट्स की अचानक बाढ़ का सीधा संबंध देश में चल रहे एसआईआर प्रदर्शनों से है। इन सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए मुख्य रूप से कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर निशाना साधा जा रहा है। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, फायरिंग या आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से जुड़ी पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी बातें लगातार फैलाई जा रही हैं, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को भड़काकर उन्हें हिंसा के रास्ते पर धकेलना है।

आईएसआई ने बदला काम करने का तरीका
जांच एजेंसियों ने जब इन हैंडल्स की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि इस बार आईएसआई ने अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। पहले आईएसआई इस तरह के फर्जी अकाउंट्स और प्रोपेगैंडा के लिए मुख्य रूप से रावलपिंडा या इस्लामाबाद के साइबर हब का इस्तेमाल करती थी, लेकिन इस बार आईएसआई ने अपने इस नेटवर्क को पाकिस्तान के कई अलग-अलग इलाकों जैसे भीमबर, रावलकोट, ताराखल, सियालकोट, कोटली, मेंढर और पेशावर में फैला दिया है।

स्थानीय लोगों और पैसों का इस्तेमाल
इन इलाकों में स्थानीय लोगों को पैसे का लालच देकर या अन्य तरीकों से रिक्रूट किया जा रहा है, ताकि वे फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स चला सकें। इसके बाद आईएसआई खुद उन्हें निर्देश देती है कि क्या और कैसे कंटेंट शेयर करना है। इन लोगों को यह भी निर्देश दिए जाते हैं कि वे विदेशों में बैठे यूजर्स को अपनी पोस्ट में टैग करें, ताकि उन झूठी खबरों की पहुंच और ज्यादा तेजी से बढ़ सके।

फैक्ट-चेक से पहले हो जाता है नुकसान
भारतीय तथ्य-जांच (फैक्ट-चेक) एजेंसियां जब तक ऐसे किसी फर्जी दावे की सच्चाई सामने लाती हैं, तब तक वह गलत जानकारी सोशल मीडिया पर अपनी जड़ें मजबूत कर चुकी होती है और लोगों की सोच को प्रभावित कर चुकी होती है। छोटे शहरों और गांवों के आम लोग फैक्ट-चेक पोर्टल्स से कम जुड़े होते हैं, इसलिए वहां तक सच पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं और तब तक अफवाहों के जरिए काफी नुकसान हो चुका होता है।

युवाओं को आसानी से बनाया जा रहा निशाना
इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं जो हर समय अपने मोबाइल फोन पर अपडेट्स देखते रहते हैं। जब किसी बड़े प्रदर्शन के दौरान अचानक कोई सनसनीखेज झूठी खबर सामने आती है, तो युवा बिना उसकी सच्चाई परखे गुस्से में तुरंत उस पर भरोसा कर लेते हैं और वह आग की तरह फैल जाती है। यदि प्रदर्शन दिल्ली में चल रहा हो, तो ऐसी फर्जी अफवाहें किसी बिल्कुल अलग जगह से प्लांट की जाती हैं, जिससे दूसरे शहरों के लोग बिना असलियत जाने तुरंत समर्थन में उतर आते हैं।

राहुल गांधी के नाम पर फैलाई गई झूठी अफवाह
हाल ही में इसका एक बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स से यह झूठी खबर फैलाई गई कि दिल्ली पुलिस ने फायरिंग कर दी है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी घायल हो गए हैं। इस तरह की अफवाहों का मकसद केवल देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कांग्रेस समर्थकों और आम जनता को भड़काना था ताकि वे भी गुस्से में आकर सड़कों पर उतर आएं और हिंसा शुरू कर दें।

'ऑपरेशन ग्राउंड वायर' के जरिए भारतीयों को भी साधा
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए आईएसआई ने इस काम के लिए सिर्फ पाकिस्तानियों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि 'ऑपरेशन ग्राउंड वायर' के तहत कुछ भारतीयों को भी पैसे देकर अपने देश के खिलाफ कंटेंट तैयार करने के काम पर लगा रखा है। हालांकि, इंटेलिजेंस ब्यूरो और देश की तमाम पुलिस एजेंसियां ऐसे सभी अकाउंट्स पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और उन्हें तुरंत ब्लॉक या रिपोर्ट करवा रही हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर हजारों की संख्या में चलाए जा रहे ये फर्जी अकाउंट्स सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।


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News Editor

Rahul Singh

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