स्पीकर ओम बिरला का बड़ा फैसला:अविश्वास प्रस्ताव पर फैसले तक स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे

punjabkesari.in Tuesday, Feb 10, 2026 - 06:52 PM (IST)

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली में संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक असाधारण फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि जब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।

हालांकि संसदीय नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन ओम बिरला ने स्वयं सदन की अध्यक्षता से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और विपक्ष—दोनों पक्षों की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन स्पीकर अपने फैसले पर कायम हैं।

 9 मार्च को हो सकती है अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा

संसदीय सूत्रों का कहना है कि बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, यानी 9 मार्च को लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 लोकसभा सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। इसके बाद सदन में हाथ उठाकर मतदान कराया जा सकता है और फिर अध्यक्षीय पीठ बहस की अनुमति दे सकती है।

 स्पीकर ने अविश्वास नोटिस की जांच के दिए निर्देश

जानकारी के अनुसार, ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा के सेक्रेटरी-जनरल को निर्देश दिया कि उनके खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव की संसदीय नियमों के तहत जांच की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। यह कदम विपक्ष की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद उठाया गया है।

कांग्रेस ने सौंपा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस

कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ औपचारिक रूप से नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस दाखिल किया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि यह नोटिस दोपहर 1:14 बजे रूल 94C के तहत प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसे विपक्ष की एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

 विपक्ष के आरोप: स्पीकर पर पक्षपात का दावा

विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सदन में विपक्षी सांसदों को बार-बार बोलने से रोका जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार प्रमुख घटनाओं का हवाला दिया गया है, जिनमें स्पीकर के फैसलों पर सवाल खड़े किए गए हैं।

राहुल गांधी को बोलने से रोकने का आरोप

विपक्ष का एक बड़ा आरोप यह भी है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी भारत-चीन सीमा विवाद (2020) पर चर्चा करना चाहते थे और उन्होंने सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख किया था, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।

सांसदों के निलंबन और अन्य विवाद

विपक्ष ने 8 सांसदों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया है। साथ ही, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर किए गए कथित व्यक्तिगत और आपत्तिजनक हमलों पर स्पीकर की चुप्पी को लेकर सवाल किए गए हैं।

इसके अलावा, विपक्ष ने ओम बिरला के उस बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का अनुरोध किया था। कारण यह बताया गया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक जाकर अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं।

संसद में बढ़ता टकराव, आगे अहम होने वाले हैं दिन

यह पूरा घटनाक्रम संसद में तेज होते राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। विपक्ष जहां स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, वहीं आने वाले दिनों में लोकसभा की कार्यवाही और अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा पर देश की निगाहें टिकी रहेंगी।


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Ramanjot

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