Old Monk अब नहीं कहलाएगी ''रम''! FSSAI ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दी दलील, बताया इसके पीछे का असली कारण
punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 10:21 PM (IST)
मुंबई: भारत के लोकप्रिय और ऐतिहासिक ब्रांड 'ओल्ड मंक' (Old Monk) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया है कि ओल्ड मंक को कानूनी रूप से 'रम' (Rum) के रूप में नहीं बेचा जा सकता है। FSSAI के अनुसार, इस उत्पाद को बनाने में न्यूट्रल स्पिरिट और रम फ्लेवरिंग (कृत्रिम स्वाद) का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण इसे 'रम' के बजाय 'रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट' (rum-flavoured spirit) लिखा जाना चाहिए।
लेबलिंग पर कोर्ट ने उठाए सवाल, कंपनी को रोज़ाना 1 करोड़ का नुकसान
यह पूरा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड़ की खंडपीठ के समक्ष चल रहा है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान निर्माता कंपनी के वरिष्ठ वकील नवरोज एच. सीरवाई ने बताया कि 120 दिनों के प्रतिबंध के कारण कंपनी को हर दिन लगभग 1 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
मामला केवल बोतल के अंदर मौजूद पेय सामग्री का ही नहीं, बल्कि उसके लेबल का भी है। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने लेबल पर लिखे शब्द "7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड" (7 years old blended) पर चिंता जताई थी, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं को यह भ्रम हो सकता है कि यह रम सात साल तक पुरानी (aged) की गई है। इसके साथ ही, पैकेजिंग पर लिखे अक्षरों के बहुत छोटे होने पर भी अदालत ने सवाल उठाए थे। इसके बाद कंपनी कोर्ट में इस वाक्यांश को हटाने और संशोधित लेबल पेश करने के लिए तैयार हो गई है।
FSSAI के राडार पर हैं कई अन्य बड़े ब्रांड्स
FSSAI की यह कार्रवाई केवल ओल्ड मंक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और मानक (मादक पेय) विनियम, 2018 के तहत मानक रम और व्हिस्की के कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। FSSAI का मानना है कि किसी भी मानक पेय में कृत्रिम स्वाद मिलाने से उसकी असली गुणवत्ता और पहचान छिप जाती है, जो उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।
इस नियामक कार्रवाई की जद में यूनाइटेड स्पिरिट्स की 'मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम', 'एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की', 'रॉयल चैलेंज व्हिस्की', और इनब्रू बेवरेजेस की 'बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की' व 'ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम' के विशेष वेरिएंट भी शामिल हैं। इस कड़े रुख के बाद यूनाइटेड स्पिरिट्स ने 24 अगस्त को अपना मामला वापस ले लिया और उसकी मूल कंपनी डियाजियो सहित अन्य शराब निर्माताओं ने विवादित फ्लेवर हटाने या लेबल बदलने पर सहमति व्यक्त की है।
11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब सभी की निगाहें 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। FSSAI ने कंपनी द्वारा सौंपे गए संशोधित लेबलों की जांच करने और उन्हें मंजूरी देने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा है। कोर्ट ने राज्य के उत्पाद शुल्क विभाग को भी संशोधित लेबल की जांच करने और इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओल्ड मंक के नए लेबल को मंजूरी मिलती है या इस मशहूर ब्रांड को एक नए नाम के साथ बाजार में उतरना पड़ेगा।
