" भारत की ही तरह नेताजी सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर के इतिहास का भी हिस्सा "

punjabkesari.in Sunday, Jan 23, 2022 - 04:38 PM (IST)

सिंगापुरः सिंगापुर के प्रसिद्ध लेखक असद लतीफ ने स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर रविवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नेताजी सिंगापुर के इतिहास का उतना ही अहम हिस्सा हैं, जितना भारत के इतिहास में उनका योगदान है। लतीफ ने भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में कहा, ‘‘बोस द्वारा भारतीय स्वतंत्रता लीग और आजाद हिंद फौज (INA) के पुनरोद्धार से वास्तव में मलया (दक्षिण एशिया के मलय प्रायद्वीप में ऐतिहासिक राजनीतिक संगठन) लोक राजनीति का आगमन हुआ क्योंकि उन्होंने मजदूरों के साथ काम किया और उनमें सम्मान के दुलर्भ भाव को जगाया।''

 

सिंगापुर में नेताजी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए लतीफ ने कहा, ‘‘उन्होंने भारत और सिंगापुर दोनों जगह साम्राज्यवादी पकड़ को नष्ट किया। रैफल्स (सिंगापुर के संस्थापक सर स्टैनफोर्ड रैफल्स) के विपरीत नेताजी भारत की तरह सिंगापुर के इतिहास का भी हिस्सा हैं।'' ‘नेताजी इन द इंडियन मेकिंग ऑफ सिंगापुर' किताब पर प्रस्तुति देते हुए लतीफ ने कहा, ‘‘रोचक तथ्य है कि 1867 तक भारतीय सरकार के बंदरगाहों में कलकत्ता के बाद दूसरा स्थान सिंगापुर बंदरगाह का था। संक्षेप में कहें, तो सिंगापुर औपनिवेशिक भारत का विस्तार था।'' उन्होंने कहा, ‘‘सिंगापुर के निर्माण में भारतीयों का प्रभाव अमिट है।''लतीफ ने रेखांकित किया कि ब्रिटिश राज ने औपनिवेशिक सिंगापुर का निर्माण लंदन के बजाय कोलकाता से किया था।

 

कोलकाता में जन्मीं और सिंगापुर में रह रहीं लेखिका नीलांजना सेनगुप्ता ने भी नेताजी की सिंगापुर में भूमिका पर प्रकाश डाला और रेखांकित किया कि नेताजी ने सिंगापुर में प्रभावशाली चेट्टियार समुदाय के दुर्गा पूजा के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था और कहा था कि वह ऐसे धार्मिक स्थल में प्रवेश नहीं कर सकते, जहां न केवल अन्य धर्मों के भारतीयों को प्रवेश नहीं दिया जाता, बल्कि हिंदुओं की कथित निम्न जातियों के प्रवेश पर भी रोक है।

 

आईएन आंदोलन पर होने वाले अनुंसधान में शामिल और 2012 में नेताजी पर पहली किताब ‘ ए जेंटलमैन्स वर्ड'' प्रकाशित करने वाली सेनगुप्ता ने बताया कि चेट्टियार आईएनए आंदोलन के सबसे बड़े दानकर्ता थे। सेनगुप्ता ने कहा कि नेताजी के जीवन का दक्षिण एशिया अध्याय अहम है, क्योंकि यहां उन्हें अपने राजनीतिक विचारों को मूर्त रूप देने की स्वतंत्रता मिली और यही वजह है कि उनकी मजबूत उपस्थिति और विरासत यहां महसूस की जाती है।


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Content Writer

Tanuja

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