लापता पत्नी की तलाश में न्यूयॉर्क से भारत पहुंचे दीपक डंडू: बताया- 10 मिनट पहले मिला था आखिरी संदेश

punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 08:32 AM (IST)

काठमांडू: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर के पास अचानक आई कुदरत की भयावह तबाही से बिल्डिंग को मिट्टी, पत्थरों और पानी की एक दीवार ने अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से जुड़े 80 श्रद्धालुओं समेत सैकड़ों लोग सैलाब की चपेट में आकर लापता हो गए हैं, जबकि मध्य नेपाल में अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।  इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद लोगों में श्रीदेवी वेजेला भी शामिल थीं। वह दीपक डंडू की पत्नी थीं और सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के उन 80 सदस्यों में से एक थीं जो माउंट कैलाश और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा से लौट रहे थे।

अपनी पत्नी की उम्मीद न छोड़ते हुए, अमेरिकी नागरिक डंडू ने न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हैदराबाद के लिए उड़ान भरी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी उस ग्रुप का हिस्सा थीं और बाढ़ की चपेट में आने के समय ग्यिरोंग इमिग्रेशन बिल्डिंग के अंदर थीं।

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Sridevi Vejella

उन्होंने बताया कि सेंटर में घुसते समय ग्रुप लीडर ईशा फाउंडेशन के संपर्क में थे, और यह सब आपदा आने से ठीक 10 मिनट पहले हुआ। इससे पहले ईशा फाउंडेशन के प्रमुख जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) ने रोते हुए एक भावुक संदेश जारी कर बताया कि सुबह 9:05 बजे ग्रुप लीडर से आखिरी मैसेज मिला था कि वे इमिग्रेशन पहुंच गए हैं। ठीक 9 मिनट बाद, यानी 9:14 बजे यह तबाही आई और बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह बह गई।

दीपक डंडू ने बताया, संपर्क पूरी तरह से टूट गया था। डंडू ने कहा कि वह मंगलवार तक अपनी पत्नी के लगातार संपर्क में थे। उन्होंने बताया था कि वह वापस लौट रही हैं, जिसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।

श्रीदेवी को हैदराबाद लौटना था, जहां उनका 13 साल का बेटा परिवार के साथ रुका हुआ था। वह उनके साथ भारत आया था। डंडू ने अपने बेटे के बारे में कहा, "सारी खबरें सुनकर वह बहुत परेशान है। मुझे लगता है कि वह बहुत दुखी है। मैं वहां जाकर उसके साथ रहने की कोशिश कर रहा हूं।" आंखों में आंसू और कांपती आवाज़ के साथ डंडू ने बताया कि श्रीदेवी हमेशा से यह तीर्थयात्रा करना चाहती थीं क्योंकि यह उनके लिए जीवन भर का सपना था।

 अपने YouTube चैनल पर ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव को आंखों से आंसू बहते हुए उन्हें यह कहते हुए देखा गया, "यह एक भयानक और असाधारण घटना है।" उन्होंने कहा, "हमारे ग्रुप्स में से एक, S3 ग्रुप, जिससे हम सागा में मिले थे और ट्रेकिंग के दौरान भी मिले थे, वे नीचे आ रहे थे।" उन्होंने बताया कि बाढ़ आने से 9 मिनट पहले फ़ाउंडेशन को ग्रुप लीडर से आखिरी बार खबर मिली थी।

उन्होंने कहा, "सुबह 9:05 बजे, उन्होंने मैसेज भेजा कि वे इमिग्रेशन पहुंच गए हैं। उसके बाद, 9:14 बजे यह घटना हुई।" उन्होंने आगे कहा, "अगर वे पार कर गए होते, तो उनका नेपाल वाला फ़ोन चालू हो जाना चाहिए था। ऐसा नहीं हुआ। इसलिए असल में पूरा ग्रुप बिल्डिंग के अंदर ही था।"

नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कहा कि इस हफ़्ते की शुरुआत में अचानक आई बाढ़ वाली जगह पर जलस्तर बढ़ने से एक और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। अथॉरिटी ने कहा, "उसी जगह पर, जहां बुधवार को अचानक बाढ़ आई थी, कीचड़ मिला हुआ पानी का स्तर बढ़ गया है और इलाके में और बाढ़ आने का खतरा है।"

अथॉरिटी ने खोज और बचाव अभियान में शामिल लोगों के साथ-साथ भोतेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की कि वे बहुत सतर्क रहें और किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।
 
पुलिस के अनुसार, चितवन ज़िले से 233, नवलपरासी ईस्ट से 154, गोरखा से 46 और धाडिंग से 40 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 37, तनाहु से 30, नवलपरासी वेस्ट से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए। चीनी अधिकारियों ने यह भी बताया कि तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन के ग्यिरोंग काउंटी में 5  लोगों की मौत हुई है। बुधवार सुबह जब रसुवा और आस-पास के ज़िलों में अचानक बाढ़ आई, तब से कम से कम 1,924 लोग लापता हैं, इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।


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Content Editor

Anu Malhotra