क्या टल सकती थी नेपाल की तबाही? 3 महीने पहले ही मंडराने लगा था खतरा, जानें किसकी लापरवाही से गई 900 लोगों की जान?
punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 12:05 PM (IST)
नई दिल्ली : नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी ग्लेशियर टूटने और बाढ़ के तांडव ने भारी तबाही मचाई है। इस बीच रॉयटर्स की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इस त्रासदी से करीब तीन महीने पहले मई में नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें नेपाल ने सीमावर्ती इलाकों के मौसम और ग्लेशियरों का सटीक डेटा समय पर साझा करने की मांग की थी लेकिन चीन से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई।
बता दें कि काठमांडू में 27 मई को हुई इस बैठक में नेपाल के 10 और तिब्बत सहित चीन के करीब एक दर्जन अधिकारी शामिल हुए थे। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन का मकसद ग्लेशियरों की शुरुआती हलचल और जलस्तर की जानकारी समय से पाना था।

नेपाल का कहना है कि चीन की तरफ से केवल भारी बारिश का सामान्य पूर्वानुमान भेजा जाता है जिसमें एवलांच (हिस्खलन), जलस्तर और ग्लेशियर मूवमेंट का सटीक डेटा शामिल नहीं होता। नेपाल अब चीन के साथ एक मजबूत डेटा-शेयरिंग डील चाहता है जिससे हर 10 मिनट पर नदियों के जलस्तर का रियल-टाइम डेटा मिल सके।
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नेपाल में स्थित चीनी दूतावास ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों देश लगातार संपर्क में थे और सुदूर हिमालयी क्षेत्र की निगरानी करना बेहद कठिन है। चीन का दावा है कि उसके मौसम केंद्र ने आपदा से 12 दिन पहले भारी बारिश और लैंडस्लाइड की आशंका का ईमेल भेज दिया था। नेपाल और तिब्बत में इस भीषण आपदा के कारण अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 275 भारतीयों समेत 3,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

आपदा के बीच करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला जा चुका है। बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई गांवों, कस्बों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है।शवों के मिलने का सिलसिला अभी भी जारी है। इस बीच अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर नई चेतावनी जारी की है और बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों व बचावकर्मियों को पूरी तरह अलर्ट रहने को कहा है।
